अपने गुस्से को ताकत बनाओ कमजोरी नहीं,ताकि तुम्हारी मंजिल तुम्हें मिल जाए.

163
4

अपने गुस्से को ताकत बनाओ कमजोरी नहीं,ताकि तुम्हारी मंजिल तुम्हें मिल जाए.

अपने गुस्से को ताकत बनाओ कमजोरी नहीं,ताकि तुम्हारी मंजिल तुम्हें मिल जाए.एक मर्तबा की बात है,एक शख्स हजरत इमाम अली रज़ी अल्लाह ताआला अन्हु की बारगाह में आया, और अर्ज़ करने लगा ,या अली आप फरमाते हैं कि अल्लाह ताआला ने हर मखलूक को किसी न किसी मकसद के लिए पैदा फरमाया है,अपने गुस्से को ताकत बनाओ कमजोरी नहीं,ताकि तुम्हारी मंजिल तुम्हें मिल जाए.
तो इस गुस्से का क्या मतलब है, जो इंसान पर हावी होता है,और इंसान एक दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं, तो इमाम अली रज़ी अल्लाह ताआला अन्हु ने फरमाया।
अल्लाह अपने बंदों से प्यार करता है, तभी अल्लाह ने हर तरह की नेमत से अपने बंदों को नवाज़ दिया है, लेकिन अफसोस उन नेमतों का इन्सान गलत इस्तेमाल करते हैं, गुस्सा एक ऐसी ताकत है जो इंसान को मेहनत पर मजबूर करती हैं,
ऐ शख्स यह याद रखना अगर गुस्सा ना होता तो इस जमीन पर कोई इंसान गैरत ना करता, कोई इंसान मेहनत नहीं करता, कोई इंसान आगे बढ़ने की जुस्तुजू नहीं करता, गुस्सा एक जोश है जुनून है वह जोश जो इंसान को अपनी मंजिल पाने की तरफ माइल करता है।अपने गुस्से को ताकत बनाओ कमजोरी नहीं,ताकि तुम्हारी मंजिल तुम्हें मिल जाए.लेकिन अफसोस तो यह है कि यह इंसान इस गुस्से को अपने ज़ुबान और हाथों से ज़ाया कर देते हैं।
और इनका जोश मर जाता है,तभी वह अपने मन्ज़ील से मुनहरीफ  हो जाते हैं।
गुस्सा बुरा नहीं, लेकिन गुस्से का गलत इस्तेमाल बुरा है।
फिर उस शख्स ने कहा या अली मैं अपने गुस्से का कैसे इस्तेमाल करूं,इमाम अली रज़ी अल्लाह ताआला अन्हु ने फरमाया, तुम अपने गुस्से को ताकत बनाओ कमजोरी नहीं,
अपने गुस्से को जोश की लिबास पहना कर मेहनत की राह पर चलाते रहो, लोगों की तल्ख रवैया का जवाब अपनी मेहनत से दो, ताकि तुम्हारी मंजिल तुम्हें मिल जाए, फिर तुम पर हंसने वाले तुम्हारी तारीफ करने लग जाए।
यह लेख अच्छा लगा तो लाइक और शेयर कमेंट जरुर करें।
इसे भी पढ़ें।

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here