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इतिहास के बारे में जानकारी-Information about history

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इतिहास के बारे में जानकारी-Information about history

दोस्तों अगर आप इतिहास के बारे में जानकारी रखते हैं तो आप निश्चित तौर पर प्राचीन भारतीय आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सभ्यता भाषा विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन भारत द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के बारे में अनुभव के नहीं होंगे. तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषा मानी जाती है जिसके शुरुआत भारत में हुई इसके अलावा संस्कृत को भी ना सिर्फ हिंदी बल्कि सभी यूरोपियन भाषाओं की जननी माना जाता है। भारत नें पूरी दुनिया को पढ़ना लिखना सिखाया।
न जाने कितने गणितज्ञ और अविष्कारक प्राचीन भारत में हुए हैं ।

जिस समय भारत में वेद लिखे जा रहे थे ।आयुर्वेद योग और चिकित्सा आदि का विकास हो चुका था ।उस समय तक यूरोप और अमेरिका में आदिवासी घूमते थे।
भारत में सबसे पहले व्यापार की शुरुआत हुई। जिससे भारत सोने की चिड़िया कहलाया।

सम्राट अशोक के समय में भारत का विस्तार अफगानिस्तान तक पहुंच गया था।
दोस्तों आखिर क्या कारण था कि अनेकों अस्त्र और शस्त्र का आविष्कार करने वाले हमारे भारत को हजारों वर्षों तक गुलाम रहना पड़ा ।

आखिर क्यों और कैसे विदेशी आक्रमणकारियों के आगे भारत के शूरवीर राजाओं ने घुटने टेक दिए।
आज मैं आपको तीन ऐसे महत्वपूर्ण हालातों के बारे में बताऊंगा जिनके चलते पूरी दुनिया का विश्व गुरु कहे जाने वाले भारत का मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास दरिद्रता और गुलामी मे गुजरा।

भारत में जैन और बौद्ध धर्म का उदय होते और जैन धर्म की मूल शिक्षा अहिंसा है जैन धर्म में तो अहिंसा परमो धर्म माना गया है।

सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाने के बाद उसने युद्ध करना बिल्कुल ही छोड़ दिया और अहिंसा का प्रचार-प्रसार करने लगा यहां तक कि उसने शिकार खेलने पर भी रोक लगा दी।

युद्ध न करने के कारण सैनिक कमजोर पड़ते गए और वह अपनी से निकला भूलते नहीं इसी प्रकार से अहिंसा का पर्चा के बीच अधिक प्रचार करने से पंजाबी अहिंसक हो गई जो कि आसानी से किसी भी आक्रमणकारी का शिकार बन सकती थी।
असल में अहीनसा भी एक बेहद कारगर हथियार है ‌
लेकिन यह हर हालात पर लागू नहीं हो सकता।
असल में अहिंसा भी एक बेहद कारगर हथियार है लेकिन

यह हर हालत पर लागू नहीं हो सकता

अगर कोई आपके घर के बाहर थूके और आप रोजाना मुस्कुराते हुए उसका थुक साफ करें तो हो सकता है कि एक दिन उसे अपनी गलती का एहसास हो जाए और वह थुकना बन्द कर दे।

लेकिन एक गाल पर थप्पड़ खाने के बाद दूसरा गाल आगे करना अपने बचाव में बेहद हास्यपद तरीका है।

वैसे ही है कि अगर कोई बदमाश हमारी बहन के साथ जबरदस्ती करें और आप उसके पास जाकर कहें कि भाई तूने मेरी बहन की तो इज्जत लूट ली अब मेरी मां की भी लूट ले और सोचे कि इससे उस बदमाश का हृदय परिवर्तन हो जाएगा।

जब मोहम्मद बिन कासिम नें सिर्फ 3000 सैनिक लेकर अफगानिस्तान और सिंध पर आक्रमण किया तो उसने आसानी से फतह हासिल कर ली।

पाकिस्तान और सिंध पर आक्रमण किया तो उसने आसानी से फतह हासिल कर ली क्योंकि वहां अधिक संख्या बौद्ध धर्म के लोगों की थी।

जिनके लिए अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म थी उन्होंने बिना लड़ाई किए ही अपनी हार मान ली जबकि मोहम्मद बिन कासिम की छोटी सी सेना

को आसानी से हराया जा सकता था उसके बाद गोरी और गजनबी आए और उन्होंने

अफगानिस्तान से अहिंसावादी पौधों का नाम और निशान मिटा दिया और आज वह एक भी बुद्धि नहीं है इसी तरह से जैन धर्म भी अति अहिंसावादी होने के कारण विदेशी

आक्रमणकारियों का मुकाबला नहीं कर सका और चुकी दोनों ही धर्म सनातन धर्म की शाखाएं मानी जाती हैं तो निश्चित तौर पर उनकी शिक्षाओं का प्रभाव हिंदुओं पर भी पड़ा और वह भी

अहिंसक हो गए जिस कारण से मुगलों का सामना नहीं कर पाए।
समाज का फटा हुआ होना हमारे देश में लोगों का हुजूम है लेकिन यह हुजूर कभी समाज नहीं बन सका आज ही की तरह मध्यकालीन और प्राचीन भारत में भी 85% जनसंख्या वेश्या और शूद्रों की होती थी किंतु शिक्षा पर अधिकार सिर्फ ब्राह्मणों का होता था और लड़ना सिर्फ क्षत्रियों का ही फर्ज होता था जबकि क्षत्रियों की संख्या लगभग 5% ही थी यानी जब बाहर से आक्रमणकारी हमारे देश पर हमला करते थे तो सिर्फ 5% लोग हैं उनका सामना करते थे और बाकी के 95% लोग दूर बैठकर तमाशा देखते थे अगर कोई नीची जाति का माने जाने वाला व्यक्ति सेना में शामिल होना भी चाहता था तो उसे लज्जित कर के भगा दिया जाता था।

पाली कि वह कितना ही काबिल क्यों ना हो लेकिन मन बहुत दूर और अफगानी लुटेरों के सामानों की संरचना में ऐसे विभाजन नहीं थी वह होने पर क्या लिखकर सम्मान से जी सकता था यह से निकल कर अपने देश की हिफाजत कर सकता था वहां एक खुली प्रतियोगिता थी इसलिए युद्ध कौशल का बहुत तेजी से विकास हुआ।

आसमान तक इतनी ज्यादा थी कि क्षत्रियों में भी आपसी फूट थी क्षत्रिय खुद आपस में ही लड़ते रहते थे वह कोई भी आदमी योग्य होने पर शिखर सम्मान से जी सकता था ।

यह सैनिक बनकर अपने देश की हिफाजत कर सकता था वहां एक खुली प्रतियोगिता थी इसलिए युद्ध कौशल का बहुत तेजी से विकास हुआ भारत में असमानता इतनी ज्यादा थी कि क्षत्रियों में भी आपसी फूट दिया खुद आपस में ही लड़ते रहते थे इसी वजह से विदेशी आक्रमणकारियों ने एक-एक करके सभी राजाओं को हराना शुरू कर दिया जो कि मिलकर एक साथ उन लुटेरों का सामना नहीं करते थे अंग्रेजों का फायदा उठाया और हिंदू और मुस्लिम के बीच में फूट डालो शासन करो की नीति से अपना राज कायम किया उसकी बात तो यह है कि हम भारतीयों में आज भी भेदभाव पूर्ण रुप से बरकरार है और इसका फायदा उठा रहे हैं राजपूतों के बड़े-बड़े उसके एक छोटा सा देश है जिसने अमेरिका में हुए थे कार्यक्रम के अनुसार उन्हें गांधी जी की समाधि दिखलाई गई तो वह बोले कि मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप की समाधि कहा है मुझे महाराणा की समाधि देखनी है जब वह राणा प्रताप की समाधि दिखाई गई तो उन्होंने बताया कि हम आज भी स्कूलों में अपने बच्चों को महाराणा की जीवनी पढ़ाते हैं हम ने अमेरिका को महाराणा की विधि और उनके जीवन से हराया था पराक्रम कार्यों का सामना नहीं किया एक और गलती जो राजपूत करते थे वहीं की गुनी अपने उसूल अपनी जान से भी ज्यादा प्यारी थी जब मोहम्मद गोरी ने आक्रमण किया तो पृथ्वीराज ने उसे पकड़ कर यह कह कर छोड़ दिया कि राजपूत कभी निहत्थों पर वार नहीं करते लेकिन वहीं मोहम्मद गौरी को मिला तो उसने बहुत बुरी यात्रा देकर पृथ्वीराज को मौत के घाट उतार दिया चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह जी को पकड़ कर छोड़ दिया रावल रतन सिंह और अलाउद्दीन खिलजी को कई बार कर कर छोड़ दिया लेकिन हिंदी में आंसर आते ही धोखे से रतन सिंह को बंदी बना लिया ठीक इसी तरह से बाहर में भी राणा सांगा के राजपूतों का फायदा उठाकर ही उन्हें युद्ध में हराया फूलों का फायदा उठाकर ही उन्हें युद्ध में हराया मुगल आक्रमणकारी को एक ही चाहिए संतुष्ट रहते थे इसके विपरीत रूप 9 को डिस्टर्ब करने के लिए जीवन भर संघर्ष किया इसके वजह से नहीं चाहिए संघर्ष किया किसी वजह से एक बेहतरीन युद्ध कला सीख पाए भूख लगने पर भी अपने ही घरों को मारकर खा जाते थे उनके अंदर बेहद खूंखार प्रवृत्ति पलट चुकी थी जिसे वह एकजुट होकर अचानक से पूरी शक्ति लगा कर हमला करते थे जब पहाड़ी तापते युद्ध के दौरान पौधों का इस्तेमाल करने लगी थी तो भी राजपूत अपनी तलवार पर एक करो और भरोसा दिखाते रहे मुगलों के साथ कई युद्धों में राजपूतों की सैन्य शक्ति मुगलों से ज्यादा थी लेकिन आपसी मनमुटाव के चलते किसी की नहीं सुनते थे और निश्चित ही बड़ी सेना का कोई फायदा नहीं है जब तक वह संगठित होकर ना रहे वहीं दूसरी और मुगलों की सेना उसूलों पर नहीं बल्कि अनुशासन पर कोई भी आदेश काJanuary उल्लंघन करता तो दुश्मन से पहले उसको सजा दी जाती थी और चाहे है मुगलों की यही खूंखार राजपूतों के ऊपर हमेशा खाली पड़ी रही और भारत की गुलामी का कारण बनी तो चलिए दोस्तों जानकारी आपको पसंद आई होगी।

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