Home हीन्दी कहानीयां

एकता की ताकत Strength of unity

1

एकता की ताकत Strength of unity

एकता की ताकत Strength of unityकिसी कुम्हार के घर में एक बहुत मोटा सांप रहता था ,एक बार वह अपने बिल से निकलकर साथ वाले छोटे से बिल में घुसने लगा तो उसका शरीर घायल हो गया। घायल सांप को देखकर चीटियां उस पर टूट पड़े सांप ने बहुत सी चीटियों को मारा अनेक को कुचला। फिर भी वह चीटियों को समाप्त ना कर सका। नहीं वह उन्हें डरा सका चीटियां घायल सांप के शरीर को नोच नोचकर खा गई और सांप मर गया।

एकता की ताकत Strength of unity

इसी से मैं आप से कहता हूं कि एकता की शक्ति को ध्यान में रखो और मैं जो भी कहता हूं उसे ध्यान से सुनो।
मैंने जो उपाय सोचा है उसे पांचवा उपाय कहा जाता है आप लोग मुझे अपना झूठा शत्रु घोषित करो और मुझे मारपीट कर रास्ते में फेंक दो और खुद सब साथियों को लेकर सामने परिवर्तन पर चले जाओ मुझे बहुत दूर।

इसी बीच शत्रु मुझे शत्रु का शत्रु अपना मित्र समझकर अपना मित्र बनाकर अपने पास रखेगा और मैं उन्हें झूठी मित्रता का विश्वास दिला कर उनके सारे भेद लेता रहूंगा मैं उनको धोखे से मारता रहूंगा बस यही एक चाल है जिससे कि हम शत्रु तक पहुंच कर उसकी उसे समाप्त कर देंगे।

राजा ने अपने मंत्री को बात मान ली और उसने झूठ-मूठ से उससे झगड़ा शुरु कर दिया।
यहां तक की नौबत मारपीट तक भी पहुंच गई थी।

एकता की ताकत Strength of unity

बस फिर क्या था उस मंत्री कहोगे को मारपीट कर सामने चौराहे पर फेंक दिया गया जख्मी मंत्री को देखकर जुल्फों को जासूस होने के भेद लेने के लिए इसे सर्वश्रेष्ठ मार्ग माना और शत्रु का शत्रु मित्र वाली बात उनकी समझ में आ गई उधर को का राजा अपनी प्रजा समेत अपना राज्य छोड़कर पहाड़ियों की ओर निकल भागा था।

उल्लू राजा ने जब अपने गुप्त चोरों से यह सारी कहानी सुनी तो वह बड़ा खुश हुआ यह अवसर तो बहुत अच्छा था एक तो शत्रु का निवास स्थान मिलेगा दूसरी उनका मित्र शत्रु जो आप हमारा मित्र होगा उनके सारे भेज देगा।

उल्लू राजा के कहने पर भी उल्लू उसे अपने राजा के पास ले गए उल्लू राजा ने उसे जख्मी हालत में देख कर पूछा अरे तुम्हारी यह हालत सारे शरीर में से खून यह सब क्यों हुआ उल्लू महाराज मैं क्या बताऊं उस पापी का कॉकरोच ने मेरा यह हाल कर दिया वह आप परआक्रमण करना चाहता था।।

मैंने उन्हें ऐसा करने से रोका क्योंकि मैंने उन्हें कहा था कि यह लोग हमसे बहुत शक्तिशाली है।

इसीलिए उनको कुछ भेंट देकर संधि कर लेनी चाहिए। यह सुनते ही उसने मुझे आपका गुप्तचर समझकर मुझे यह सजा दी। अब मैं आपके कदमों में पड़ा हूं अब तो आप ही मेरे मालिक हैं उस धोखेबाज वह अत्याचारि ने मुझे मार कर फेंक ही दिया है।

अब तो मुझे उससे बदला चुकाना है और मैं आप को उनके निवास स्थान तक ले जाकर उन सब को मरवा दूंगा। उल्लू राजा ने कौए की बात सुनकर अपने पांचों मंत्रियों को बुलवाकर यह पूछा कि अब मुझे क्या करना चाहिए।

पहले मंत्री ने कहा यह हमारा शत्रु है इसे मार देना चाहिए दुर्बल शत्रु को बल पाने से पहले ही मार डालना चाहिए क्योंकि बाल पाकर वह शक्तिशाली हो जाएगा ऐसा कहा गया है

जलती हुई चिता काटा हुआ फल देखो

जो प्रेम टूट गया वह फिर नहीं जुड़ता।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here