Home Education एक ही दिन को एक ही तरह से साठ 70 साल जी...

एक ही दिन को एक ही तरह से साठ 70 साल जी लेना जिंदगी नहीं है मेरे दोस्त

1

एक ही दिन को एक ही तरह से साठ 70 साल जी लेना जिंदगी नहीं है मेरे दोस्त

जिंदगी को वैसा होने जैसा तुम चाहते हो यह कैसे मुमकिन है, जब तुम ना अपनी मर्जी से पैदा हुए. और ना अपनी मर्जी से मरोगे.
एक ही दिन को एक ही तरह से साठ 70 साल जी लेना जिंदगी नहीं है मेरे दोस्त.
कोई खुशी कोई रिश्ता या कोई जज़्बा हमेशा के लिए नहीं होता, उनके पांव होते हैं.
बस हमारा सुलुक और रवैया देख कर कभी हमारे पास आ जाते हैं,और कभी आहिस्ता आहिस्ता दूर चले जाते हैं.
दो तरह के लोगों से हमेशा बचो एक वह जो तुम्हें वह नुख्स बताएं जो तुम मे नहीं,
दूसरा वह जो तुम्हें वह खुबी बताएं जो तुम में ना हो.एक ही दिन को एक ही तरह से साठ 70 साल जी लेना जिंदगी नहीं है मेरे दोस्त
अल्फाज़ का इंतखाब सोच-समझकर करें,क्युंकि आपके अल्फाज़ आपकी तबीयत, खानदान और आपके मीजाज़,का पता देती है.
खुशमिजाज़ी ऐसी खुशबू है जो मीलों दूर से महसूस की जा सकती है.
गुरुर और नफरत का नशा शराब से भी ज्यादा होता है.
जो इस नशे में मुब्तला हो जाता है वह जल्दी होश में नहीं आता है.
जिंदगी लंबी नहीं बल्कि खूबसूरत होनी चाहिए मुस्तक़बिल बेहतर बनाने के लिए माजी को जान लेना जरूरी है
तीन चीजों को कभी छोटा मत समझो ,मर्ज़,कर्ज़, और फर्ज़.
अच्छे लोगों के साथ अच्छे से पेश आना बड़ी बात नहीं, बलके बुरे लोगों के साथ अच्छे से पेश आना बहुत बड़ी बात है.
लोगों से प्यार करो और चीजों से इस्तेमाल इसका उल्टा करोगे तो जिंदगी में कुछ भी सीधा नहीं होगा.
पैसों का साथ सिर्फ मौत तक, और अपनों का साथ सिर्फ कब्र तक होता है.
लेकिन अपनी जिंदगी में किए हुए अच्छे काम, मरने के बाद भी साथ देते हैं.
लफ़्ज़ इंसान के गुलाम होते हैं लेकिन सिर्फ बोलने से पहले, बोलने के बाद तुम उसके गुलाम बन जाते हो.
अपनी जुबान को सोच समझकर इस्तेमाल करने वाला हमेशा फायदे में रहता है.
तबदीली ना तो कोई ला सकता है,ना तो कोई रोक सकता है,बस उसका हिस्सा बन सकते हैं.
तुम्हारी नियत की अजमाइश उस वक्त होती है, जब तुम किसी ऐसे शख्स को फायदा पहुंचाओ, जो तुम्हें बदले में कुछ ना दे सके.
इंसान की फितरत का अंदाज़ा उसके छोटे काम से ही हो जाता है, बड़े-बड़े काम तो वह सोच समझकर करता है.
हमेशा सच बोला करो ताकि तुम्हें ज़ेहन पर ज़ोर डालकर यह याद करना ना पड़े, के तुमने क्या कहा था.
सांप से ज्यादा इंसान से डरा करो.
सांप सिर्फ अपने दिफा के लिए डसता है.
और इंसान अपने मुफाद के लिए.
खुशी की हालत में कभी वादा मत करना.
और गुस्से की हालत में कभी कोई फैसला मत करना.
मर्द का इम्तिहान औरत से और औरत का इम्तिहान पैसे से होता है.
कभी कभी मरने के लिए ज़हर की ज़रूरत नहीं होती.
हस्सास इंसान के तो,रवय्या ही मार देती है.
और यह बहुत बड़ी दर्दनाक मौत होती है.
जब रिश्ता निभाना मुश्किल हो जाए तो उसे निभाना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह के हवाले कर देना चाहिए.
उम्मीद आधी जिंदगी है,और आधी मौत है.
अपनों से इतनी शिकायत मत किया करो,ऐसा ना हो के वह शिकायतों को दूर करते-करते खुद ही दूर ना हो जाए.
दोस्त वह है जो दोस्ती का हक दोस्त के गैर मौजूदगी में अदा करें, और गैरों की मह़फ़िल में उसकी इज्जत की हिफाज़त करें.
अखलाक और रवैंय्यों का एहसास हमें उस वक्त तक नहीं होता, जब तक हमारे साथ ना बरते जाए.
जब किसी इंसान को किसी से रिश्ता तोड़ना होता है,तो सबसे पहले अपनी जुबान से मिठास खत्म करता है.
इसे भी पढ़ें
ह़ज़रत लुकमाने ह़कीम जिस भी पौधे को छूता था.वह पौधा उसे खुद बताता था

1 COMMENT