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औरंगजेब के बारे में 3 ऐसी बातें

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औरंगजेब के बारे में 3 ऐसी बातें

औरंगजेब के बारे में 3 ऐसी बातें दोस्तों आज हम इस लेख में औरंगजेब के बारे में 3 ऐसी बातें जानेंगे जो सब को नहीं मालूम

1औरंगजेब ने शाहजहां को कैद में रखकर क्यों मारा था।

2 औरंगजेब ने अपने भाई को क्यों मारा था

3 औरंगजेब का चीन के राजा से जंग क्यों और कैसे हुई थी

दोस्तों आज हम इन तीन बातों को पूरी डिटेल से बताएंगे तो आप इस लेख को पूरा आखिर तक पढ़ते रहें।

1 नंबर एक औरंगजेब ने शाहजहां को कैद क्यू किया था।

दोस्तों हमें इस बात को जानने के लिए औरंगजेब के कुछ कानूनों को समझ लेते हैं।

दर हकीकत मुगलिया सल्तनत के शुरुआती से आखिर तक, यानी बाबर से लेकर आखिर बहादुर शाह जफर तक। यह कानून रही है।

जहां तक मुगल बादशाह का कब्जा होता था उससे मुगल बादशाह टैक्स वसूला करते थे।

और इस टैक्स की सारी रकम उसी के काम में इस्तेमाल की जाती थी। उन पैसों को जो कि असल में आवाम के पैसे थे। उन पैसों को मुगल बादशाह अपने कामों में अपने ऐश व आराम में बिल्कुल नहीं लेते थे।

मगर शाहजहां ने अपने दौर में उन पैसों का इस्तेमाल गलत कामों में किया। जैसा कि आप जानते हैं कि शाहजहां ने ताजमहल की बुनियाद डाली थी। ताजमहल को बनवाने में जितनी खर्च हुई थी। इतनी दौलत हिंदुस्तान की किसी भी किले या महल को तामीर करने में नहीं लगी।
और सारी दौलत आवाम की टैक्स की थी।

शाहजहां ने औरंगजेब के बारे में एक दस्तावेज पर यह लिखकर दिया के उसके बाद औरंगजेब ही बादशाह होंगे। इसके बाद औरंगजेब जब तख्त नशीन हुआ, तो उसने देखा कि आवाम का पैसा बेकार कामों में खर्च किया जा रहा है।

तो औरंगजेब ने शाहजहां को कैद करने का हुक्म दिया। औरंगजेब के हुक्म पर शाहजहां को कैद कर लिया गया। और शाहजहां को एक कोठरी में बंद कर दिया गया। शाहजहां को कोठरी में बंद करने देने के बाद ,औरंगजेब ने खुद शाहजहां से मिलने कोठरी में गया।
और शाहजहां से कहा कि आप जिस दौलत को फालतु कामों में खर्च कर रहे हैं।
वह दौलत आप की नहीं है बल्कि आवाम के खून पसीने की कमाई हुई रकम है।

और इसे ऐसे ही लुटा देना शरीयत ए इस्लाम के खिलाफ है। दोस्तों ताजमहल के तरह एक दूसरी ताजमहल और बनाया जाने वाला था।

जो कि पहले वाली ताजमहल से भी ज्यादा पैसा में बनने वाला था।

और वाह दूसरी काला ताजमहल कभी बना ही नहीं, और उसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि औरंगजेब ने शाहजहां को कभी मौका दिया ही नहीं।

या इसलिए भी यह काला ताजमहल जब औरंगजेब ने शाहजहां को कैद कर लिया। तो कुछ दिनों बाद ही शाहजहां की मौत हो गया था।

और शाहजहां की मौत इसके कई दिनों की बीमारी के बाद हुई थी। तकरीबन ओलमा ने किताबों में लिखा है। यह बीमारी 7 दिनों तक रही थी तो
इससे यह भी मालूम होता है कि शाहजहां को कैद करने से पहले ही वह बीमार था।और इसी बीमारी की वजह से शाहजहां की मौत हुई थी।

2 नंबर दो औरंगजेब ने अपने भाई को क्यों मारा था।

औरंगजेब की इस कहानी के जानने के लिए, हमें अकबर की जमाने में जाना होगा। क्योंकि यह बात अकबर के जमाने से शुरू हुई थी। अकबर बादशाह ने अपने दौर में एक नया धर्म बनाया था।
जिसका नाम दीन-ए-इलाही था इस दिन ए इलाही में तमाम धर्म की अच्छी-अच्छी बातें शामिल किया था। और जो चीज है मुश्किल थी उसे खत्म कर दिया गया था। अकबर की इस नए धर्म को खतम करने के लिए बहुत से पंडितों ने भी बहुत कोशिश की थी।मगर जीस सख्श ने सबसे ज्यादा मेहनत की थी वह मुस्लिमों के आलीम थे
जिसका नाम मुज्जद्दीदे अलफ़सानी था।

मुज्जद्दीदे अलफ़सानी ने अपनी पूरी ताकत इस धर्म को खत्म करने में लगा दी। आखिर में अकबर ने मुज्जद्दीदे अलफ़सानी के सामने तोबा की और फिर से कलमा पढ़ कर मुसलमान हो गया।

मगर अब भी कुछ लोग ऐसे बचे थे जो इस धर्म को मानना नहीं छोड़ा था। और यही लोग धर्म को आगे बढ़ाते हुए लेते आए, और औरंगजेब के सौतेला भाई जो शाहजहां की दूसरी बीवी से पैदा हुआ था ।इस धर्म को मानना शुरू कर दिया था,
और इस धर्म को जहां पर वह हाकिम था ।उस जगह पर फैलाना शुरू कर दिया था

औरंगजेब ने पहले तो उसे यही कहा कि तुम इस्लाम मे वापस आ जाओ वरना हम तुम्हें कत्ल कर देंगे। मगर वह न माना और औरंगजेब के खिलाफ खड़ा रहा। यहां तक कि जो टैक्स मुगल बादशाह वसूला करते थे। छोटे राजाओं से उसने उसे देना भी मना कर दिया।

औरंगजेब ने सोचा कि अगर हम उससे जंग करुंगा तो इसमें नुकसान मुगलिया सल्तनत का होगा। और जिन से जंग की जाएगी उसमें अक्सर लोग मुसलमान होंगे। इसीलिए औरंगजेब ने सिपाहियों को हुकुम देकर उसे खत्म करवा दिया।और उसकी जगह दूसरा नायब मुकर्रर कर दिया गया।जिसने अकबर के बनाए हुए दीन-ए-इलाही को जड़ से खत्म कर दिया। और आज उसी दिन के मरने वाला कोई नहीं और आज उसी दिन के मानने वाला कोई नहीं है।

3 नंबर तीन औरंगजेब को चीन के राजाओं से जंग क्यों हुई, और क्यों हुई

चीन में एक बहुत खूबसूरत मंदिर है जहां पहले हिंदुस्तान के लोग जाया करते थे। मगर बाद में चीन के राजाओं ने हिंदुस्तानियों पर पाबंदी लगा दी।

उस वक्त के हिंदुओं ने औरंगजेब से मदद मांगी
और औरंगजेब ने फौरन ही हुकुम दिया। उस मंदिर को अपने हिंदुस्तानियों के लिए आजाद करवाने जाएंगे।

औरंगजेब की पूरी जिंदगी में इससे बड़ी जंग कभी नहीं हुई थी। और नहीं इतनी दूर का सफर औरंगजेब ने कभी तय किया था। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए औरंगजेब ने पहले तो दो राजाओं से मुकाबला किया।
इसके बाद इनको हराकर औरंगजेब वहां तक पहुंचा। और वहां पर भी एक राजा मौजूद था।जो बुद्धम धर्म के मानने वाला था। इसमें पूरा एक महीना गुजर गया। जिससे औरंगजेब की जंग हुई।
इसमें औरंगजेब को भी काफी मार लगी और बुरी तरह घायल हो गए थे।
जब यह जब खत्म हुई तो उस मंदिर को और उस पूरी रियासत को औरंगजेब ने अपने सल्तनत में शामिल कर लिया।

हिंदुस्तान की तारीख में ऐसी जंग कभी नहीं हुई। के किसी राजा ने पूरे 2महीने तक सफर कीया हो ,और इस बीच 3 जंग एक साथ तीन राजाओं से जंग किया हो।

और किसी मुसलमान बादशाह ने सिर्फ अपने रियाया और अपने कौम के हिंदुओं के लिए यह सब किया हो।

और इस जंग में काफी हद तक मुगलिया सल्तनत की फौज कम हो चुकी थी। और दौलत भी काफी हद तक कम हो चुकी थी। मगर औरंगजेब काफी खुश था कि औरंगजेब की वजह से उसके कौम को अब कभी भी मुसीबत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मगर शायद कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
भारत की आजादी के बाद चीन ने फिर से उस पर कब्ज़ा कर लिया।

और जवाहरलाल नेहरू से चीन के लोगों ने यह कहा, हमने तुम्हारे किसी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। बल्कि उस जमीन को वापस लिया है। जिसको औरंगजेब हमसे छीन कर ले गया था।

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