Home हीन्दी कहानीयां कोशिश करने से ही क़ामयाबी मिलती है।

कोशिश करने से ही क़ामयाबी मिलती है।

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कोशिश करने से ही क़ामयाबी मिलती है।

कोशिश करने से ही क़ामयाबी मिलती है।

बीहार की श्रयसी सिंह ने 61वी नैशनल शुटीन्ग चैम्पियन शीप में गोल्ड जीतकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचम लहरा दिया है।

बीहार की जमुई जिले के छोटे से गांव गध्दौर से निकल कर नैशनल और इंटरनैशनल शुटीन्ग इवेंट में जलवा दिखाने वाली 25साला श्रेयसी सिंह ने साबित कर दिया की लगन और मेहनत हो तो हर मंजिल को फतेह कीया जा सकता है।

श्रेयसी सिंह का कहना है कि कौमन वैल्थ गेम्स
से कुछ समय पहले उन्होंने ने इटली में ट्रैनिंग ली थी।जीस में नीशाना लगाने की जमकर प्रैक्टिस की। और खुद पर भरोसा भी बढ़ाया।

श्रेयसी सिंह आगे कहती हैं कि उन की मेहनत और लगन के साथ उनके कोच और मैंनटर परमजीत सिंह सोढ़ी ने उनके खेल को नीखारने और संवारने में कड़ी मेहनत की है।

बीहार के बांका की संसद रह चुकी पुतुल देवी श्रेयसी सिंह की मां है। और केंद्रीय मंत्री रह चुके
दीग्वगजय सिंह उनके पिता। नीशानेबाज़ी
जो मानो श्रेयसी सिंह के खुन में रची-बसी है।
क्युके उनके पिता भारतीय नीशानेबाज़ी संघ में अध्यक्ष थे।

और दादा सुरेन्द्र सिंह राष्ट्रीय राइफल संघ के अध्यक्ष रह चुके थे।

घर में खेलखीलाड़ी दोनों का माहौल होने का श्रैयसी सिंह को खुब फाइदा मीला। और उन्होंने बचपन से ही पढ़ाई के साथ निशानेबाजी में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया था।

अपनी कामयाबी से खुश श्रेयसी सिंह कहती है कि आज भी भारतीय समाज में लड़कियों के खलने कुदने में ज़्यादा बढ़ावा नहीं दीया जाता है।
लड़कियों को सही टरेनिंग और मौका दिया जाए तो वे किसी भी मामले में लड़कों से कमतर नहीं है।

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