क्या बड़ा आदमी(Rich man)बनने में किस्मत या मुकद्दर का भी दखल है in hindi

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क्या बड़ा आदमी बनने में किस्मत या मुकद्दर का भी दखल है in hindi.

एक बादशाह के दो बेटे थे. एक का नाम अब्बास और छोटे का नाम वक़ास था. दोनों मुख्तलिफ मिजाज और सोच के मालिक थे. एक मर्तबा बादशाह ने अपने दोनों बेटों को बुलाकर एक सवाल किया “यह बताओ इंसान बड़ा आदमी कैसे बनता है?”
अब्बास ने जवाब दिया,
अब्बा हुजूर…“ इंसान बड़ा आदमी दौलत से बनता है.”
इसके बाद छोटे बेटे ने अर्ज किया.
अब्बा जान… “इंसान बड़ा आदमी मुकद्दर से बनता है.”
बादशाह ने बड़े बेटे को बड़ी रकम देकर कहा, “अच्छा अब तुम बड़ा आदमी बनकर दिखाओ,”
दोनों शहजादे वहां रुखसत हुए.
उस मुल्क में एक गरीब मछुआरा भी रहता था. शहजादा अब्बास उस मछुआरे के पास गया, और वह रकम उसको दे दी.
मछुआरा इतनी रकम देख कर बहुत खुश हुआ उसने इस रकम में से कुछ रकम मटके के कोने में छुपा कर रख दिया, और बाकी रकम लेकर बाजार गया और एक चादर और गोश्त लिया, और बाकी रकम चादर के एक कोने में बांध दी, वही एक चील चादर में गोश्त बंधा देखा तो उड़ती हुई आई और चादर खींचकर उड़ गई.
दूसरी तरफ मछुआरे की बीवी वह मटका जिसमें रकम रखी हुई थी, कूड़ा कबाड़ खरीदने वाले के हाथों बेच दिया, और इस तरह वह मछुआरा एक मर्तबा फिर गरीब हो गया.
कुछ दिनों बाद दोनों शहजादे उस मछुआरे के पास आए और उसका हाल अहवाल पूछा तो मछुआरे को गमगीन और उदास देखकर बहुत हैरान हुए, मछुआरे ने बताया मैं एक मर्तबा फिर गरीब हो गया, तबाह और बर्बाद हो गया, क्योंकि आपकी दी हुई रकम मेरे हाथ से निकल गई.
बड़े शहजादे ने पूछा “मगर कैसे?”
मछुआरे ने वह सारा वाकया सुनाया.
अब छोटे शहजादे वकास ने मछुआरे को तसल्ली दी और कहा फिकर मत करो,
“अब मैं तुम्हारी मदद करूंगा.”
उसने मछुआरे को एक रुपए दिया, मछुआरे ने वह एक रुपए एक तरफ रख दिया क्योंकि इतनी मामूली रकम से अपनी हालत कैसे सुधार सकता था.
उसी शाम को मछुआरे का एक और पहचान वाला मछुआरे आया और कहने लगा मेरा जाल फट गया है अगर मुझे कुछ रुपए दे दो तो मैं जाल की मरम्मत कर लूंगा, और इसके बदले कल मैं जितनी मछलियां पकड़ूंगा उसमें से आधी तुम्हें दे दूंगा, मछुआरे ने वह रुपए उसको दे दिया.
दूसरे मछुआरे ने जाल ठीक करके दरिया में डाला काफी देर बाद उसमें सिर्फ दो मछलियां फसी चुनांचे वो घर वापस आया और एक मछली खुद रखा, और दूसरे मछली वादे के मुताबिक मछुआरे को देने चला गया, जिसने उसे एक रुपए दिया था.
रुपया देने वाले ने अपनी बीवी से कहा आज मछली काट कर ही पकालो, चुनांचे उसकी बीवी ने मछली काटने शुरू कर दी जब मछली का पेट चिरा तो उसके अंदर असली किमती हीरा के अंगूठी पड़ी थी, मछुआरा और उसकी बीवी बहुत खुश हुए, और वह अंगूठी लेकर बाजार जा रहा था कि रास्ते में उसे दरख़्त के टैहनी में फसी चादर नजर आई, जो चील लेकर उड़ गई थी.
अब वह बहुत खुश हुआ, खैर उसने बाजार में बहुत बड़ी जोहरी के हाथों वह अनमोल हीरा बेच डाला, जिससे उसको बहुत बड़ी रकम मिली,
आज वह गरीब मछुआरा बेहद अमीर आदमी बन चुका था, उसने अपने लिए बहुत बड़ी हवेली बनवाई और बड़ी शान के साथ रहने लगा.
हवेली में कई मंजिलें और नौकर थे अब उसने बड़े पैमाने पर मछलियों का कारोबार भी शुरू कर दिया था.
कुछ अरसा बाद दोनों शहजादे एक बार फिर उस गरीब मछुआरे के झोपड़ी में पहुंचे, लेकिन वहां एक आलीशान हवेली मौजूद थी, मछुआरे ने शहजादों का इस्तकबाल किया शहजादे मछुआरे का शान शौकत देखकर हैरान भी हुए और खुशी भी,
अब तो बड़े शहजादे को इस बात का यकीन हो गया “सिर्फ दौलत से इंसान बड़ा आदमी नहीं बनता बल्कि किस्मत भी कोई चीज है”
बड़ा आदमी बनने में किस्मत या मुकद्दर का भी दखल है.
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