Home Education ज़िंदगी के तीन सुनहरे उसूल हमेशा याद रखो|ह़ज़रत अली|in hindi.

ज़िंदगी के तीन सुनहरे उसूल हमेशा याद रखो|ह़ज़रत अली|in hindi.

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ज़िंदगी के तीन सुनहरे उसूल हमेशा याद रखो|ह़ज़रत अली|in hindi.

ह़ज़रत अली रज़ी अल्लाह ताअला अन्हु से एक शख्स ने पूछा या अली आपके जिंदगी में कोई ऐसी ह़सरत है जो रह गए हो?
तो ह़ज़रत अली रज़ी अल्लाह ताअला अन्हु ने फ़रमाया, मेरी जिंदगी में दो ह़सरतें रह गई, जितना मुझे इल्म था उतना किसी ने पूछा नहीं
दूसरा जितना मैं सखी था उतना किसी ने मांगा नहीं.
आप ने फ़रमाया ज़िंदगी के तीन सुनहरे उसूल हमेशा याद रखो पहली यह उस से ज़रूर माफी मांगो जिसको तुम चाहते हो, दूसरा यह उसे मत छोड़ो जो तुम्हें चाहता है. तीसरा यह उस से कुछ न छुपाओ जिस पर तुम दवा करते हो.
Always remember the three golden principles of life.
First of all, definitely apologize to what you want.
आप ने फरमाया, दोस्त से संभलकर दोस्ती करो हो सकता है वह किसी दिन तुम्हारा दुश्मन बन जाए, और दुश्मन से संभलकर दुश्मनी करो हो सकता है कल वह तुम्हारा दोस्त बन जाए.
ज़ुबान का वज़न बहुत हल्का होता है लेकिन बहुत कम लोग इसको संभाल पाते हैं.
Zuban is very light weight, but very few people handle it.
आप ने फ़रमाया जिस्म एक दुकान है,और ज़ुबान उसका ताला, जब ताला खुलता है तो मालूम होती है दुकान सोने की है या लोहे की.
जिंदगी तेज हवाओं की तरह है जिसने इसे बर्दाश्त कर ली,वह कभी गम की घटा नहीं देखता,
हज़रत अली रज़ी अल्लाह ताअला अन्हु की खिदमत में एक शख्स आया और अर्ज़ करने लगा.
या अली हमें यह कैसे पता चले कि मुझ पर जो मुसीबत आई है यह अल्लाह की तरफ से अजमाइश है, या हम पर अल्लाह की तरफ से सजा है?
आप ने फरमाया ऐ शख्स जो मुसीबत तुम्हें अल्लाह की तरफ ले जाए वह आजमाइश है और जो मुसीबत तुम्हें अल्लाह से दूर कर दे वह सजा है.
हज़रत अली रज़ी अल्लाह ताअला अन्हु की खिदमत में एक यहुदी आया और अर्ज़ करने लगा
आप मुसलमान जब इबादत करते हो तो वसवसे और खयालात आते हैं. जबकि हम इबादत करते हैं तो हमें नहीं आते.
तो हज़रत अली रज़ी अल्लाह ताअला अन्हु ने फ़रमाया अगर एक घर फकीर का हो और एक घर अमीर का तो चोर कहां जाएगा?
यहूदी ने कहा आमिर के घर में तभी तो शैतान उनको सताता है जिनके दिल में अल्लाह की मोहब्बत है.
जिसके दिल में अल्लाह मोहब्बत नहीं होतीे वहां शैतान का क्या काम है.
आप ने फ़रमाया जब तुम्हारे जान का खतरा हो तो सदक़ा देकर जान बचाओ, जब तुम्हारे दिन का खतरा हो तो जान देकर दिन बचाओ.
आप ने फ़रमाया जिंदगी दो दिन की है,एक तुम्हारे हक़ में दूसरा तुम्हारे मुख़ालिफ़. जिस दिन तुम्हारे हक़ में हो उस दिन गुरुर मत करना.
जिस दिन तुम्हारे मुख़ालिफ़ हो उस दिन सब्र करना.
किसी को मदद करते वक्त उसके चेहरे की तरफ मत देखो, हो सकता है उसकी शर्मिंदगी आंखें तुम्हारे दिल के अंदर गुरुर की बीज बो दे.
तीन चीजें इंसान को तबाह कर देती है. अमीरों की महफिल और.
औरतों की सोह़बत और जाहिलों से बहस.
Three things destroy the person. The rich and the rich.
Love of women And debate with gossip.
हज़रत अली रज़ी अल्लाह ताअला अन्हु ने फ़रमाया जानवरों में ख्वाहिश
और फरिश्तों में अक़्ल होती है.
मगर इंसान में अल्लाह पाक ने दोनों रखी है. अगर अक़्ल को दबा ले तो जानवर, और अगर ख्वाहिश को दबा ले तो फ़रिश्तों की मानीद होते हैं.
आप ने फरमाया अपने जिस्म को ज़रूरत से ज़्यादा मत संवारों उसे तो मिट्टी में मिल जाना है. सवारना है तो अपने रुह़ को संवारों क्योंकि उसे अल्लाह के पास लौट कर जाना है.
मोमिन की मिसाल तराजू के पलड़े जैसी है, जिस क़दर ईमान में इजाफ़ा होता है, उतनी ही उसकी आजमाइश बढ़रती है.
आप ने फरमाया अच्छे लोगों की खूबी है उन्हें याद नहीं रखना पड़ता वह याद ही रहता है.
आप ने फरमाया रिज़्क़ पीछे अपनी ईमान मत खराब करो.
रिज़्क़ इंसान को ऐसे तलाश करता है,जैसे मरने वालों को मौत.
हज़रत अली रज़ी अल्लाह ताअला अन्हु ने फ़रमाया रिश्ते खून के नहीं बल के एहसास के होते हैं. अगर एहसास हो तो अजनबी भी अपने हो जाते हैं.अगर एहसास ना हो तो अपने भी अजनबी हो जाते हैं.
एक मर्तबा कसाब आवाज़ लगा रहा था ताज़ा गोश्त है ले लो वहां से हजरत अली का गुज़र हुआ कसाब ने कहा या अली ताजा गोश्त है ले जाएं. ह़ज़रत अली ने फ़रमाया आज मेरी जेब इजाज़त नहीं देती.
कसाब ने बोला मैं आप से उधार कर सकता हूं. इस पर आपने एक हिकमत भरी जुमला इरशाद फरमाया आपने फरमाया ये उधार मै अपने पेट से क्यों न कर लूं जिसको मैं जन्नत में इससे बेहतर गिज़ा खिला सकता हूं.
ह़ज़रत अली ने फ़रमाया लफ़्ज़ इंसान के गुलाम होते हैं, मगर सिर्फ बोलने से पहले तक बोलने के बाद इंसान अपने लफ़्ज़ों का गुलाम बन जाता है.
आप ने फरमाया कोई तुम्हारा दिल दुखाए तो नाराज़ मत होना…क्योंकि कुदरत का कानून है जिस दरख्त का फल ज्यादा होता है लोग पत्थर भी उसी को मारते हैं.
आप ने फ़रमाया किसी का ऐब तलाश करने वाला इन्सान उस मक्खी की तरह है, जो सारा खूबसूरत जिस्म को छोड़ कर सिर्फ जख्म पर बैठती है.
आप ने फरमाया अच्छा दोस्त चाहे कितना भी बुरा बन जाए, उससे दोस्ती कभी मत तोड़ना क्योंकि पानीे चाहे कितना भी गंदा हो आग बुझाने के ज़रुर काम आते हैं.
आप ने फरमाया जिंदगी की हर मोड़ पर सुलाह करना सीखो क्योंकि झुकता वही है जिसमें जान होती हैं. अकड़ना तो मुर्दे की पहचान होती है.
दोस्त हो या परिंदा दोनों को आजाद छोड़ दो,लौट आया तो तुम्हारा,
अगर लौटकर नहीं आया तो वह तुम्हारा कभी था ही नहीं.
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