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जादूई पेड़ की कहानी | Story of Magic tree in Hindi | moral stories.

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जादूई पेड़ की कहानी | Story of Magic tree in Hindi | moral stories

हेलो दोस्तों आज हम लेकर आए हैं एक जादूई पेड़ की कहानी। तो चलिए शुरू करते हैं।

एक समय की बात है एक छोटे से गांव में रहते थे तीन भोले-भाले, राम, गोपाल, और रवि। एक बार उन्होंने जंगल के बीचो-बीच एक अजीब सा पेड़ देखा। उसको समझ नहीं आया कि यह है क्या? और आपस में उलझने लगे। राम ने कहा मैंने एक अजीब पेड़ जंगल में देखा उसके कोई पत्ते नहीं थे। और बहुत अलग लग रहा था। गोपाल ने कहा सच में मैंने भी वही पेड़ देखा। परंतु तुम जैसे बोल रहे हो वैसा तो नहीं था। पेड़ बहुत सुंदर और लाल कलियों से भरा था। राम ने बोला यह कैसे संभव है। तुम जंगल के बीचो बीच वाले पेड़ ही की बात तो कर रहे हो ना!
लगता है तुमने कोई अलग पेड़ देखा होगा राम ने कहा। गोपाल बोला हां भाई मैं वही जंगल के बीच वाले पेड़ की बात कर रहा हूं।
फिर रवि ने कहा हां हां वह कोई जादुई पेड़ लगता है। जब मैंने देखा तो हरे पत्तों से भरा था। और कोई फूल भी नहीं थे। तीनों भाई इस बात पर झगड़ा करने लगे। पास की एक ब्राह्मण उसकी बातें सुनकर हंसने लगा। उसने कहा ओ मेरे भोले बच्चों वह कोई जादुई पेड़ नहीं है। उसको बोलते हैं लाल कलियों का पेड़। रामू ने उसे वसंत ऋतु से पहले देखा, इसीलिए वह पेड़ सुखा था। रवि ने उस पेड़ को बसंत के मौसम में देखा, इसलिए पेड़ में लाल लाल कलियां खिले हुए थे। और गोपाल तुमने इस पेड़ को बसंत के बाद दिखा, इसीलिए पेड़ में सिर्फ हरे पत्ते थे। और तब तक सारे फूल भी झड़ गए। तुम तीनों ने अलग अलग समय पर इस पेड़ को देखा। इसलिए सोचा कि यह एक जादुई पेड़ है। परंतु है नहीं। इस प्रकार ब्राह्मण ने उस मासूम लड़कों को यह बात समझाई।

जादूई पेड़ की कहानी | Story of Magic tree in Hindi
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