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तुम अपने फैसले सही किया करो, तुम्हारा मुस्तक़बिल सही नसीब(success)हो जाएगा.

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तुम अपने फैसले सही किया करो, तुम्हारा मुस्तक़बिल सही नसीब(success)हो जाएगा

ह़ज़रत अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु की खिदमत में एक शख्स आया.और आर्ज करने लगा या अली मेरा नसीब बड़ा खराब है.
जिंदगी में जो भी काम किया सिवाय नाकामी के कुछ नहीं मिला,और मुझे लगता है कि मेरा आने वाला वक्त भी बदतरीन है.बस यह कहना था तो इमाम अली इब्ने अबी तालिब ने फरमाया.
तुम्हारे औलाद है तो उसने कहा मेरे तीन बच्चे हैं, क्या तुम चाहोगे कि तुम्हारे बच्चे जिंदगी में नाकाम हो जाए, कदम कदम पर सिर्फ तकलीफे देखें.
उसने कहा नहीं या अली वह मेरे बच्चे हैं. मै यह कैसे चाहूंगा तो इमाम अली ने कहा, जितना तुम अपने बच्चों से प्यार करते हो, इस से 70 गुना अल्लाह अपने ख़ीलकत से प्यार करता है.
याद रखना अल्लाह ने हर इंसान के मुकद्दर में क़ामयाबी और कामरानी लिख रखी है. लेकिन इंसान गलत फैसले करके, अपने मन्ज़ील से मुनहरीफ हो जाते हैं.और अपनी गलती तस्लीम भी नहीं करते.
तुम अपने फैसले सही किया करो, तुम्हारा मुस्तक़बिल सही हो जाएगा. नसीब को बदलना अल्लाह ने तुम्हारे वजूद में रखा है.नसीब(success)
उसने कहा या अली मुझे कैसे पता चले, तो इमाम अली ने कहा जब इंसान किसी फैसले को करता है. तो उस वक्त यह देखे, इसमें मेरी खुशी है या फायदा.
तुम्हारे एहसासात और जज्बात तुम्हें तुम्हारी खुशी की तरफ माइल करना चाहेंगे.
लेकिन तुम्हारा दिमाग तुम्हें तुम्हारा फयदे की तरफ.
हर खुशी को तजुर्बात की मीज़ान में तौल कर देखो, अगर फायदा हो तो कदम बढ़ाओ अगर सिर्फ खुशी हो फायदा नहीं.
तो उससे दूर हो जाओ, और अपने आपको एक मर्तबा नजर उठा कर देखो.नसीब(success)
तुम में वह कौन सी ऐब है जिसकी वजह से तुम्हारी मंजिल तुम से दूर है.तुम अपने फैसले सही किया करो, तुम्हारा मुस्तक़बिल सही नसीब(success)हो जाएगा.
अगर जुबान तलख है तो अपने रवैया सही करो. अगर फैसले पसत है तो अपना मयार ऊंचा करो.
फिर देखना तुम्हारी मंजिल तुम्हारे क़दमों में आ जाएगी.नसीब(success)
ऐ शख्स याद रखना अल्लाह ने बज़ाहीर, नसीब बदलाना इंसान के हाथ में नहीं रखा है, लेकिन कोई इंसान अपनी आदत बदल देता है.
तो अल्लाह उसका नसीब बदल देता है. और अगर तुम चाहते हो कि वक्त से पहले अपने आने वाले वक्त को देख लो.
तो जब भी रात को सोने का इरादा करो, 70 मर्तबा सूरह फातिहा पढ़ कर यह दुआ मांगों.
ए मेरे अल्लाह मुझे ख्वाब इलहाम दिखा, और मुझे जो आने वाले वक्त में नुकसानात मिलने वाले हैं उनकी तरफ इशारा कर.
तो ऐसे ख्वाब आना शुरू हो जाएंगे जिसमें तुम्हारे आने वाले वक्त के लिए बेहतरीन इशारे होंगें.
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