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मर्द चार चार शादियां कर सकता है, लेकिन यह आजादी औरत को क्यों नहीं मिली

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मर्द चार चार शादियां कर सकता है, लेकिन यह आजादी औरत को क्यों नहीं मिली in hindi.

एक मर्तबा खलीफा के दरबार में कुछ औरतें आई, और हैरत से पूछने लगी इस्लाम में मर्द एक वक्त में चार चार शादियां कर सकता है, लेकिन यह आजादी इस्लाम में औरत को क्यों नहीं मिली, वह एक वक्त में चार शादियां क्यों नहीं कर सकती?

गौर व फिक्र के बाद सब इधर-उधर देखने लगे, और कोई इत्मीनान बक्स जवाब ना दे सके, तो इतने में इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु को बुलाया गया, और यह सवाल इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु के खिदमत में पेश किया गया,

तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने अपने गुलाम कंबर से कहा कंबर! एक पानी का बर्तन लेकर आओ, कंबर जैसे ही पानी का बर्तन सामने रखें, फिर इमाम अली ने औरतों से कहा चार औरतें अपने हाथों में कोज़े लेकर आए,और इस पानी के बर्तन में से अपने अपने हिस्से का पानी निकाले, चार औरतों ने अपने-अपने कोज़े भर लीए.

इमाम अली ने कंबर से कहा इस पानी के बर्तन को खाली करके लाओ, बस खाली करके जैसे ही उस बर्तन को रखा गया, तो इमाम अली ने उन औरतों से फ़रमाया अब जो तुम्हारे हिस्से का पानी है वो पानी फिर से इस बर्तन में डालो, उन औरतों ने अपने अपने हिस्से का पानी उस बर्तन में डाल दिया.

बस यह होना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया अब जो जो पानी तुम्हारे हिस्से के था, इस पानी में से ढूंढ कर अलग अलग करके अपने पास फिर से रखो, औरतों ने हैरत से इमाम अली की तरफ मुखातिब होकर कहने लगी या अली यह सारा पानी तो आपस में मिल गया, इसे पहचानना नामुमकिन है.

इमाम अली ने फ़रमाया जब तुम अपने हिस्से का पानी नहीं पहचान सकती, तो बताओ जब चार चार सोहर (पती/husband) रखोगी तो अवलाद कैसे पहचानोगी, अपने बेटे को क्या बताओगी कि उसका बाप कौन है, वो औरत सर झुकाने लगी और कहने लगी या अली हमें हमारा जवाब मिल गया.

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