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मेरी उम्मत की सबसे बदतरीन शख्स कौन है

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मेरी उम्मत की सबसे बदतरीन शख्स कौन है

मेरे प्यारे भाईयों और दोस्तों
अपने रब के सामने रोना और इतराफे गुनाह करना, आजीज़ी से उसके सामने अपने आप को झुका देना, एक बहुत बड़ा अमल हैं। तो आज हम इस लेख में पढ़ेंगे कि किस तरह एक बदतरीन शख्स बेहतरीन इंसान बन जाता है।

एक बार हसरत मूसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह ताला से पूछा या अल्लाह तबारक व ताला मेरी उम्मत की सबसे बदतरीन शख्स कौन है।

तो अल्लाह ताला ने जवाब दिया कल सुबह जो शख्स पहले मिलेगा वह तुम्हारी उम्मत के सबसे बदतरीन शख्स है।

कल सुबह जब मूसा अलैहिस्सलाम घर से निकले उन्होंने एक शख्स को देखा कि अपने बेटे को कंधे पर बैठे हुए गुजरा हैं। तो मूसा अलैहिस सलाम नें अपने दील मे सोचा तो यह शख्स मेरी उम्मत के सबसे बदतरीन इनसान है।

फिर मूसा अलैहिस सलाम ने अल्लाह ताला से मुखातिब हुआ, और कहा या अल्लाह तू मेरी उम्मत के सबसे अच्छा इंसान को भी दिखा दे।

तो अल्लाह ताला ने फरमाया कि शाम को जो शख्स आपको सबसे पहले मिले वह आप की उम्मत के सबसे अच्छा इंसान है।

हजरत मूसा अलैहिस्सलाम ने शाम को इंतजार करने लगे कि उसकी नजर सुबह वाली बदतरीन शख्स पर पड़ी। हजरत मूसा अलैहिस्सलाम ने दिल में सोचा यह तो वह शख्स है जो सुबह को मिला था।

फिर हजरत मूसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह ताला से कलाम किया, या अल्लाह यह कैसा माजरा है कि जो शख्स बदतरीन है।
वही शख्स बेहतरीन कैसे हो गया।

अल्लाह ताला ने फरमाया कि जब यह इनसान सुबह अपने बेटे को कन्धै पर बीठाए, जंगल की तरफ निकला तो इसके बेटे न उससेे पूछा,
अब्बा जान क्या इस जंगल से भी बड़ी कोई चीज है तो वह बोला हां बेटा इस जंगल से भी बड़ा पहाड़ है ।
तो उसके बेटे ने कहा अब्बा जान पहाड़ से भी बड़ा कोई चीज है। तो वह बोला हां बेटा इस पहाड़ से भी बड़ा आसमान है।

मेरी उम्मत की सबसे बदतरीन शख्स कौन है

बेटे ने कहा अबा क्या आसमान से भी बड़ी कोई चीज़ है। बाप ने एक सर्द आह बड़ी और दुख भरी आवाज से कहा हां बेटा इस आसमान से बड़ा तेरे बाप के गुनाह है।

बेटे ने कहा अब्बा करता इस गुनाह से भी बड़ी कोई चीज है। बाप के चेहरे पर एक चमक सी आ गई ,और कहा हां बेटा तेरे बाप के गुनाहों से भी बड़ा अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फीरत है।

अल्लाह ताला ने फरमाया ऐ मुसा उस शख्स की ऐतराफे गुनाह और निदामत इस कदर पसंद आया, कि मैंने उस बदतरीन शख्स को तेरी उम्मत के बेहतरीन शख्स करार दिया।

और मैंने उसके तमाम गुनाह न सिर्फ माफ कर दिए। बल्कि उसको नेकींयों में बदल दिया।

मेरी उम्मत की सबसे बदतरीन शख्स कौन है

मेरे प्यारे भाईयों और दोस्तों
अपने रब के सामने रोना और इतराफे गुनाह करना, आजीज़ी से उसके सामने अपने आप को झुका देना, एक बहुत बड़ा अमल हैं।

अल्लाह ताला हम सबको समझने और नेक अमल करने की तौफीक़ अत़ा फरमाएं।

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