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मेरे दोस्त कम दुश्मन ज्यादा होते हैं.

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मेरे दोस्त कम दुश्मन ज्यादा होते हैं.

इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु के ख़िदमत में एक शख्स आया और दस्तेअदब को जोड़कर अर्ज़ करने लगा या अली मेरे दोस्त कम दुश्मन ज्यादा होते हैं.

बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया ऐ शख्स…
अगर तुम चाहते हो के दोस्त ज्यादा दुश्मन कम हो तो तुम अपने जु़बान को नरम रखा करो…

और सलाम में पहल करो अल्लाह पाक के फज़लों करम से तुम्हारे दोस्त बढ़ना शुरू हो जाएंगे.

और एक बात याद रखना बोलो वहां जहां तुम्हारा बोलना तुम्हारी खामोशी से बेहतर हो.

जो इंसान इस तराजू में अपने अल्फाज को तोल कर बोलता है तो अल्लाह के करम से उसके दुश्मन कम होते हैं.

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