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मैं अमीर होना चाहता हूं,दौलतमंद होना चाहता हूं,ग़ुरबत ने मुझे चारों तरफ से घेरे रखा है।

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मैं अमीर होना चाहता हूं,दौलतमंद होना चाहता हूं,ग़ुरबत ने मुझे चारों तरफ से घेरे रखा है।

मैं अमीर होना चाहता हूं,दौलतमंद होना चाहता हूं,ग़ुरबत ने मुझे चारों तरफ से घेरे रखा है।
हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम जब मिस्र के अज़ीज़ थे,एक शख्स आया और दस्तेअदब को जोड़कर अर्ज करने लगा,ऐ यूसुफ अलैहिस्सलाम अल्लाह के प्यारे नबी,
मैं अमीर होना चाहता हूं दौलतमंद होना चाहता हूं, न हमारे पास कोई असबाब है ना माल है, गुरबत ने मुझे चारों तरफ से घेरे रखा है, आप मेरी मदद फरमाए,
तो यूसुफ अलैहिस्सलाम ने मुस्कुरा के फरमाया, ऐ शख्स अगर तुम यह चाहते हो कि अल्लाह तुम्हें दौलत इनायत करें तो तुम अपने थोड़े से माल में गरीबों के लिए भी हिस्सा रखना शुरू कर दो,मैं अमीर होना चाहता हूं,दौलतमंद होना चाहता हूं,ग़ुरबत ने मुझे चारों तरफ से घेरे रखा है।उस शख्स ने अर्ज किया ऐ अल्लाह के नबी मैं तो गरीब हूं मैं क्या हिस्सा रखूंगा, हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम ने कहा अगर तुम्हारे पास दिन में एक रोटी बच्ती है ,
तो उसमें से आधे दे दो, एक निबाला दे दो, चंद खजूरे बचती है तो उसमें से एक दे दो,
ऐ शख्स अल्लाह के नजदीक तादाद नहीं नियत देखी जाती है। लेकिन तुम अपने थोड़ी सी माल में गरीब के लिए अल्लाह की मखलूक के लिए हिस्सा निकालोगे, तो अल्लाह अपनी रहमत और बरकत से तुम्हे नवाज़ देगा, क्योंकि अल्लाह किसी का एहसान नहीं रखता।
अल्लाह हम सबको सदका वह खैरात करने की तौफीक अता फरमाए, और गरीब और मिस्कीन के साथ हमदर्दी और प्यार करने की तौफीक अता फरमाएं,
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