मैं यह चाहता हूं के इंसान की बुनियादी फितरत से वाकिफ हो जाऊं in hindi.

ह़ज़रत इमाम अली रज़ि अल्लाह ताअला इन्हु के खिदमत में एक शख्स आया और दस्तेअदब को जोड़कर अर्ज़ करने लगा या अली “मैं यह चाहता हूं के इंसान की बुनियादी फितरत से वाकिफ हो जाऊं और सारे इंसान मेरे साथ रहे”

लेकिन मुझे इंसान समझ में नहीं आते, बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया ऐ शख्स “अल्लाह ने इंसान की फितरत बचपन से ही तमाम इंसानों के सामने वाजेह कर के रखी है”

लेकिन अफसोस तो ये है इंसान ये देखने के बाद भी ना वाकिफ है, उसने कहा है या अली
वो कैसे? तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया ऐ शख्स “जब कोई बच्चा पैदा हो तो उसे गौर फिक्र के साथ देखो, के वो मां के साथ रहना पसंद करता है, अपने मां के लिए बेचैन होता है.

क्योंकि इंसान पैदा होते ही हर उस चीज के पीछे भागने लगता है जिससे उसको ख्याल, एहसास, प्यार, फायदा मिले, उसकी मां उसे खिलाती है, सुलाती है, उसका ख्याल रखती है.

ऐ शख्स यहां वाजेह हो गया के बच्चा मां के लिए इसलिए बेचैन नहीं होता कि उसकी मां है, बल्कि इसलिए बेचैन होता है कि उस बच्चे की मतलब उस वक्त मां से जुड़े हैं.

जैसे जैसे इंसान बड़ा होने लगता है उनकी यह फितरत बन जाती है जो चीज उसे फायदा देती है एहसास देती है. प्यार देती है, खुशी देती है यानी जिस चीज में उसका काम होता वही चीज उसे पसंद होती है.

अगर तुम चाहते हो इंसान तुम्हारे साथ रहे, तुम्हारा ख्याल रखें, तुमसे प्यार करे तो अपने आप को ऐसा बावकार बनाओ के हर इंसान के काम तुम मे बसे हो, लोगों की मतलब तुम में बसेंगे तो इंसान तुम्हारे आसपास रहने लगेंगे.

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