Home इतिहास सुल्तान महमूद गजनबी और एक मज़लुम इंसान का वाक्या।

सुल्तान महमूद गजनबी और एक मज़लुम इंसान का वाक्या।

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सुल्तान महमूद गजनबी और एक मज़लुम इंसान का वाक्या।

एक रात की बात है सुल्तान महमूद गजनबी को बहुत कोशिश करने के बाद भी रात को जब नींद नहीं आई तो अपने गुलाम से कहने लगे,
लगता है किसी मजलुम पर आज ज़ल्म हुआ है। महमुद गजनबी अपने गुलामों से कहने लगे तुम लोग गलियों में जाओ,अगर कोई नजर आए तो उसे मेरे पास ले आओ,
थोड़ी देर बाद वह सब वापस आकर कहने लगे, सुल्तान हमें कोई फरियादी नहीं मिला
आप आराम से सो जाएं, सुल्तान महमूद गजनबी को फिर भी नींद नहीं आ रही तो वह खुद अपना भेष बदलकर बाहर निकला,
महल के पिछवाड़े में उसे किसी फरयादी के रोने की आवाज सुनाई दी, वह कह रहा था ,
ऐ अल्लाह सुल्तान महमुद अपने ऐस व आराम की जिंदगी गुजार रहा है,
और महल की अकम में मुझ पर यह जुल्म तोड़ा जा रहा है।
सुल्तान ने कहा क्या बात कर रहे हो मैं महमुद हूं और मैं तुम्हारे फरियाद रसी के लिए आया हूं, मुझे बताओ क्या जुलुम है।
वह शक्स ने सुल्तान से कहा आपके खास में से एक शख्स हमारे घर आ जाता है और हमारे बीवी पर जुल्मों सितम करता है। सुल्तान ने कहा वह शख्स इस वक्त कहां है। उस शख्स ने कहा सयद वह चला गया हो,
फिर सुल्तान ने उस शख्स को अपने दरबान को दिखाया और कहा जब भी यह शख्स आए तो इसे फौरन मेरे पास पहुंचा देना,
दूसरी रात को वह शख्स आया और सुल्तान से बताया कि वह शख्स इस वक्त मेरे घर पर है। महमुद सुल्तान उसी वक्त तलवार लिए उस शख्स के साथ चल पड़ा, जब उसके घर के करीब पहुंचा तो उससे कहा तुम अपने घर के सारे चिराग बुझा दो, सुल्तान ने अंधेरे में ही उस शख्स के घर में घुसकर उस जालिम का सर तन से जुदा कर दिया।
फिर सुल्तान ने कहा चिराग रोशन कर दो, फिर सुल्तान ने उस शख्स का चेहरा देखा और सजदे में गिर पड़ा,
फिर उस घर के मालिक से कहा अगर कुछ खाने को है तो मेरे लिए ले आओ,मुझे बहुत भूख लगी है।
वह शख्स एक सूखी रोटी उठा कर के लाया। जिसे सुल्तान ने बड़ी रगवत से खाया।
वह शक्स सुल्तान से पूछने लगा चिरागों को बुझा ना और सजदे में गिरना और रोटी तलब करना इसका क्या माजरा है। तो सुल्तान ने बताया मैंने जब तुम्हारी दास्तान सुनी तो सोचा मेरे सल्तनत में ऐसा जुल्म करने की हिम्मत सिर्फ मेरे किसी बेटे की हो सकती है।
अंधेरा करने के लिए इसलिए कहा था कि मेरे बेटे की सफकत मेरे इंसाफ की राह में रुकावट ना बन जाए।
चिराग जलने पर जब मैंने देखा कि वह मेरा बेटा नहीं है तो मैंने सजदा ए शुक्र बाजा लाया।
खाना इसलिए मांगा कि जब से तुम्हारी मुसीबत का मालूम हुआ।
तब से मैंने अल्लाह के सामने कसम खाई थी कि जब तक तुम्हारे साथ इंसाफ नहीं हो जाता ।
तब तक मेरे ऊपर रोटी हराम है। उस वक्त से लेकर अब तक मैंने कुछ नहीं खाया, और कुछ नहीं पिया,
अल्लाह ताला से दुआ करते हैं कि अपने नेक बंदों के वसीलों से, हमें भी नेक और आदिल हुक्मरान अता फरमाए।आमीन।
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