Home इतिहास ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम का सबरो इम्तिहान का वाकिया|Examination in hindi.

ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम का सबरो इम्तिहान का वाकिया|Examination in hindi.

1

ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम का सबरो इम्तिहान का वाकिया|Examination in hindi.

आज से हज़ारों साल पहले मुल्क़ के शाम में एक कौम रहा करती थी. उस कौम का नाम सुरान था.
और अल्लाह उस कौम के इसलाह के लिए एक नबी मबुउस किया जिसको ज़माना आज भी अय्यूब अलैहिस्सलाम के नाम से पहचानता है.
ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम बहुत मालदार बहुत खूबसूरत अपने क़बीले के सरदार थे.
और निहायत ही इबादत गुज़ार थे आपके सात बैटे और सात बेटियां हुआ करते थी.
आपकी इज़्ज़त और मर्तबा आलम यह था के आप जहां से भी गुज़रते थे लोग खड़े होकर आपका इस्तक़बाल किया करते थी.
इमाम अली रज़ी अल्लाह ताअला अन्हु ने फ़रमाया.
जब अल्लाह किसी को अजीज़ रखता है तो उसे सब्र से आज़माता है.
बस अल्लाह ने अपने बंदे अय्यूब अलैहिस्सलाम का इम्तिहान लेना शुरू कर दिया.
अय्यूब अलैहिस्सलाम के सारे औलाद मर गए, और सारी दौलत ख़त्म हो गई.
और उसके साथ-साथ अल्लाह ने अय्यूब अलैहिस्सलाम को ऐसी बीमारी दे दी,
के अय्यूब अलैहिस्सलाम का गोश्त गलने लगा.
यहां तक की हड्डियां तक आशना होने लगी.
बस दुनिया ने अपना रुप बदलना शुरू कर दिया वह लोग जो ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की इज़्ज़त किया करती थी…
खड़े होकर इस्तक़बाल करती थी वह लोग ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की तोहीन करने लगे.
यह कहने लगे कि अल्लाह इससे नाराज़ है.
अल्लाह का अजाब है अयूब पर यह कोई नबी नहीं बल्कि यह बेइंतिहा गुनहगार है.
यहां तक की अय्यूब अलैहिस्सलाम से कोई बात करना तक नहीं चाहता था.
अल्लाह का नेक नबी मुतमईन रहा और मुसलसल अल्लाह का जिक्र अल्लाह का शुक्र करता रहा.
वह लोगों ने यह फैसला किया जो बीमारी अय्यूब को है ऐसा ना हो कि ये हमारे बच्चों को हो जाए.
उठाओ अय्यूब को इसे हमारे मोहल्ले में रहने का कोई हक नहीं.
बस लाठी और कपड़े में लपेटकर अय्यूब अलैहिस्सलाम को कचरे के ढेर पर फेंक आते हैं.
ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम के साथ उसकी बीवी और अय्यूब मुत्मइन रहकर अल्लाह का जिक्र और शुक्र करते हैं.
जब खाने के लिए कुछ नहीं बचा तो ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की जौज़ा लोगों के घर जाकर काम किया करती थी.
और जो थोड़ी सी उजरत मिला करती थी उससे ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम का इलाज कराती थी.खर्ची चलाती थी.
लेकिन ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम अल्लाह के जिक्र शुक्र में मशरूफ रहे.
तारीख़ में लिखा 12 माह 18 माह मुसलसल ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की बीमारी बढ़ती रही.
एक दिन आपकी बीवी ने कहा ऐ अल्लाह के नबी है आप अल्लाह से दुआ क्यों नहीं करते कि अल्लाह आप को शिफ़ा अता करें.
तो ह़ज़रत अय्यूब ने मुस्कुरा कर कहा मुझे यह बताओ मैंने खुशहाली में कितने बरस गुजारे.
उनके बीवी ने कहा तकरीबन 80 साल तो आप रोने लगे और कहां 80 साल खुशहाल रहे खुश रहे.
अभी 1 साल से अल्लाह ने इम्तिहान लिया तो हिम्मत को खत्म कर दुं.
जब तक अल्लाह अपने बंदे को आजमाना चाहे मैं इम्तिहान दूंगा… यहां तक कि ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम के जिस्म पर जो जख्म हुआ करती थीे उस में कीड़े पड़ गए.
और अगर कोई कीड़ा गिर जाता था तो ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम उसे उठाकर जिस्म पर रख देते थे.
और कहते थे शायद तुम्हारा रिज़्क़ अल्लाह ने मेरे जिस्म में रखा है.तुम खाओ अगर अल्लाह की यह मर्जी है तो.
यहां तक लोगों ने ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की बीवी को काम देना भी बंद कर दिया.
लोगों ने यह कहा कि ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की बीवी हमारे घरों में आती है,तो
ऐसा ना हो कि वह अय्यूब के साथ रहती है और यह बीमारी कहीं हमारे बच्चों को ना लग जाए.
इसको कोई भी मोहल्ले में काम करने नहीं बुलाएगा.
बस ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की जौज़ा रो-रो कर कहने लगी.
ऐ अल्लाह के नबी अल्लाह से दुआ करें.
अय्यूब अलैहिस्सलाम ने हाथ उठाकर कहा.
ऐ अल्लाह यक़ीनन तू रह़म करने वाला है अपने बंदे पर रहम कर.
जब यह कहना था तो आवाज़ें ग़ैब आई अय्यूब अपने पांव को ज़मीन पर मारो वहां से चश्मा निकलेगा उस से नहाओ.
जब ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम ने अपना पांव ज़मीन पर मारा तो वहां से एक चश्मा नमुदार हुआ.
जैसे ही अय्यूब अलैहिस्सलाम ने उस पानी को अपना जिस्म पर लगाया.
अल्लाह के करम से ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की बीमारी ख़त्म हो गई.और वह फिर से जवान हो गए.
और अल्लाह ने आसमान से सोना बरसाना शुरू कर दिया और अल्लाह ने ह़ज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की बीवी को भी जवानी बख्श दी.
और 23 बेटे और 27 बेटियां आता की और वह पहले से ज्यादा खुशहाल और शादमान हो गए.
बेशक अल्लाह अपने बंदों पर रहम फ़रमाने वाला है.
लाइक शेयर कमेंट जरुर करें और अपने दोस्तों में शेयर भी करें.

1 COMMENT