हिंदुस्तान पर ब्रिटिश गवर्नमेंट और उसकी हुकूमत

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हिंदुस्तान पर ब्रिटिश गवर्नमेंट और उसकी हुकूमत

हिंदुस्तान पर ब्रिटिश गवर्नमेंट और उसकी हुकूमत
ब्रिटिश गवर्नमेंट यह तुम्हें बताया जा चुका है। अंग्रेजों का असली मुल्क और वतन इंग्लैंड है। इंग्लैंड में जमानाए कदीम से बादशाही चली आ रही है। वहां की हुकूमत का नाम बर्तानवी हुकूमत है जिसे अंग्रेजी जुबान में ब्रिटिश गवर्नमेंट कहते हैं। जब अंग्रेज साहूकार अपने वतन इंग्लैंड से हिंदुस्तान आए तो यहां उन्होंने तिजारती कारोबार क़ायम किया और इसमें खूब तरक्की की बाद में मुग़ल बादशाहों की बेबसी और कमजोरी से फायदा उठाते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से अपनी हुकुमत कायम कर ली। इंग्लैंड की हुकूमत बर्तानिया ने अगर्चे ईस्ट इंडिया कंपनी की इस नहीं हुकूमत को जायज़ क़रार दिया था। और हिंदुस्तान का इंतजाम दुरुस्त रखने के लिए कंपनी के नाम हिदायत फरमान भी भेज ती रही लेकिन खुद इस ने हिंदुस्तान की अंग्रेजी हुकूमत के अख्तियार रात अपने हाथ में नहीं लिए बल्कि कंपनी ही के हाथ में रहने दिया। जिसके सबब कंपनी के कर्ताधर्ता और हुकाम आजाद बनकर हिंदुस्तान में अपनी मनमानी हुकूमत करती रहे। कंपनी के दौर हुकूमत में अंग्रेज अफसरान हिंदुस्तानियों से नौकरों और गुलामों जैसा बर्ताव करते थे। हिंदुस्तानियों को जलील निगाह से देखते थे। इन पर तरह तरह का जुल्म करते थे। इसलिए आम हिंदुस्तानियों का दिल कंपनी राज्य से बहुत पक गया था। जिस के नतीजे में सबसे पहले मेरठ छावनी में हिंदुस्तानी फौज ने 12 रमजान शरीफ 1273 हिजरी मुताबिक 10 मई 1857 ईसवी को इतवार के दिन ईस्ट इंडिया हुकूमत के खिलाफ बगावत का ऐलान किया। और अंग्रेजी फौजी अफसरों को कत्ल किया। फिर बाग़ी फौज मेरठ से रातो रात चलकर सुबह सवेरे 17 रमजान 1273 हिजरी मुताबिक 11 मई 1857 ईस्वी को दिल्ली पहुंची। और अंग्रेजी हुक्मरानों को मौत के घाट उतार कर सिराजुद्दीन बहादुर शाह जफर की बादशाहत और हुकूमत का ऐलान किया। मेरठ और दिल्ली के तरह यूपी के दूसरे जिला बरेली कानपुर झांसी लखनऊ गोरखपुर आजमगढ़ वगैरा। में भी बगावत की आग फैल गई जगह-जगह अंग्रेज हुकाम मार डाले गए। कइ एक जिला से कंपनी का राज खत्म हो गया। इस मौके पर सुन्नी मुसलमानों के बड़े-बड़े अोलमा मसलन हजरत मौलाना फजले हक खैराबादी हजरत मुफ्ती सदरुद्दीन देहलवी। मौलाना फैज़ अहमद बदायूनी वगैरह दिल्ली से इस्लामी फतवा जारी किया। अंग्रेजो के खिलाफ मुसलमानों पर जिहाद करना फर्ज है। इस फतवा से मुसलमानों में बड़ा जोश पैदा हुआ। चुनांचे जब 16 मुहर्रम 1274 हिजरी मुताबिक़ 6 सितंबर 1857 ईस्वी को अंग्रेजों ने पंजाब के सिख फौज और नेपाल की गोरखा फौज की मदद से दिल्ली हमला किया तो मुसलमानों ने भी बाग़ी फौज के साथ होकर। अंग्रेजों का मुकाबला किया लेकिन बहादुर शाह जफर के सम्धी मिर्जा इलाही बख्श और शाहि हकीम के तबीब एहसन उल्लाह खान को अंग्रेजों ने दौलत और कुर्सी का लालच देकर भरका लिया था‌। यह दोनों मुसलमानों की खुफिया कार्यवाहियों से अंग्रेजों को आगाह कर दिया करते थे। दिल्ली के मुसलमान रोज-ब-रोज कमजोर होते गए। यहां तक की 29 मुहर्रम 1274 हिजरी मुताबिक 19 सितंबर 1857 ईस्वी को अंग्रेजों ने शहर दिल्ली और लाल किला पर कब्जा कर लिया फिर रफ्ता रफ्ता यूपी के दूसरे जिला में भी बगावत की आग बुझा कर कामयाबी हासिल की और अपना एकतेदार दोबारा कायम किया। दिल्ली पर काबू पा जाने के बाद अंग्रेजों ने मुसलमानों से बहुत सख्त इंतकाम लिया। मुगल खानदान को नस्त व नाबूद कर दिया। जामा मस्जिद दिल्ली की बहुत बेहुरमती की। मुगल शाहजदो को खुले मैदान कत्ल करवाया। बेशुमार मुसलमानों को निहायत बेदर्दी से शहीद किया। हजरत मौलाना फजले हक खैराबादी रह़मा का। घर और जायदाद जप्त करके जज़ीराए एंडमैन में ले जाकर कैद किया। आखिरी मुगल बादशाह सिराजुद्दीन बहादुर शाह जफर पर झूठा मुकदमा चलाकर हिंदुस्तान से जिला वतन किया। और नगुन ले जाकर जिंदगी भर के लिए नजर बंद कर दिया। जिस जमाना में यहां हिंदुस्तान में बगावत हुई । उस वक्त इंग्लैंड में मल्लिका ए वकटोरिया की बादशाह हद थी। जब हिंदुस्तान की बगावत का मामला विक्टोरिया के सामने पेश हुआ तो उसने ईस्ट इंडिया कंपनी की हुकूमत खत्म करके अखतीयारात अपने हाथ में ले लिए। और हिंदुस्तानियों के नाम एक फरमान भेजा जिसका लॉर्ड कैनिंग ने 24 रवि अव्वल 1275 हिजरी मुताबिक यकूम नवंबर 1857 ईस्वी को इलाहाबाद के दरबार में पढ़कर सुनाया। इसमें लिखा था कि। हिंदुस्तान की सल्तनत का इंतजाम मलकाय विक्टोरिया ने ईस्ट इंडिया कंपनी से अपने हाथ में ले लिया है। सब रीयाया बराबर समझी जाएगी। किसी की मज़हब में दखल नहीं दिया जाएगा। हिंदुस्तान में इंग्लिशतान के बादशाहो की हुकूमत 1257 हिजरी मुताबिक 1858 ईस्वी से 27 रमजान शरीफ 1366 हिजरी मुताबिक 14 अगस्त 1947 ईस्वी तक रही। फिर यह मुल्क 28 रमजान शरीफ 1366 हिजरी मुताबिक 15 अगस्त 1947 ईस्वी को ब्रिटिश गवर्नमेंट के नीचे से आजाद होकर दो हिस्सों में तक्सीम हो गया। छोटे हिस्से का नाम पाकिस्तान और बड़े हिस्से का नाम भारत है। ऐ अल्लाह मुल्क के मालिक!तु जिसको चाहता है हुकूमत देता है। और जिससेे चाहता है हुकूमत छीन लेता है।

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