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Allah Hum se Kiya Chahta Hai | Allah Hum Se Naraz Hai ya Nahi,in Hindi

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Allah Hum se Kiya Chahta Hai, Allah Hum Se Naraz Hai ya Nahi – अल्लाह हमसे क्या चाहता है अल्लाह हम से राज़ी है या नाराज़ है, आज इसी के बारे में चंद बातें जानेंगे तो चलिए शुरू करते हैं।
इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु के ख़िदमात में एक शख्स आया, और दस्तेअदब को जोड़ कर अर्ज करने लगा,
या अली! हमें कैसे पता चले कि अल्लाह हमसे नाराज़ है या राज़ी?
बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया, ऐ शख्स याद रखना, अल्लाह ने ज़कात इसलिए वाजिब की ताकि इंसान अल्लाह के बंदों के लिए रिज़्क़ और खुशहाली का सबब बने।
अल्लाह ने हज इसलिए वाजिब किया ताकि इंसान सफर की तकलीफ समझकर जो लोग तिजारत करते हैं, या परदेस जाकर रिज़्क़ (प्रावधान) तलाश करते हैं, उनकी तकलीफ को समझ सके।
अल्लाह ने रोज़ा इसलिए वाजिब किया ताकि इंसान भूख की तरप को समझ सके, और जो इंसान दिन में मुश्किल से एक वक्त की खाना खाते हैं, उसकी भूख को समझ कर उसकी मदद कर सके।
अल्लाह ने नमाज इसलिए फर्ज किए ताकि इंसान अपने सर को सजदे में रखकर अपने दिल में खौफ ए खुदा पैदा करें, और उसी खौफ ए खुदा की वजह से वो डरता रहे कि मुझसे अल्लाह के बंदे को कोई तकलीफ ना पहुंचे।
याद रखना अल्लाह ने (ह़ुक़ूक़ अल्लाह) को वजूद इसलिए बख़्शा ताकि इंसान (ह़ुक़ूक़ुल इबाद) को पाताल न करें।
ऐ शख्स अगर कोई इंसान यह समझना चाहता है,
के अल्लाह उस से राज़ी है या नाराज़ तो वो तो “खुद से सवाल करें”
तो वो कहने लगा, या अली कौन से सवाल?
तो इमाम अली ने फ़रमाया अपने आप से सवाल ये करें, कि उसके दिल में अल्लाह के मखलूक़ के लिए एहसास है या नहीं?
अल्लाह के मखलूक़ के लिए हेतराम है या नहीं?
अगर उस इंसान के वजूद में अल्लाह के मखलूक़ात के लिए, एहसास कायम है तो वो ये यक़ीन रखें, के उसका अल्लाह उसे राज़ी है, उसकी इबादत अल्लाह के दरबार में कबूल और मकबूल है।
लेकिन अगर कोई इंसान नमाजें पढ़ता रहे,
हज करता रहे,
जकात देता रहे,
लेकिन उसके दिल में अल्लाह के मखलूक के लिए कोई एहसास ना हो, तो वो ये जान ले कि अल्लाह उससे नाराज़ है।
और उसकी इबादत को रोज़े मैहशर उसके मुंह पर मारेगा।
दोस्तों अगर हम भी चाहते हैं कि अल्लाह हम से राज़ी हो जाए तो हम भी अपने पड़ोसियों के साथ हुस्ने सुलूक करें, अगर उन पर कोई परेशानियां हो तो उसकी मद करें।
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