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Garoor Takabbur | Arrogation Ke bare men kuchh aham Jankari in Hindi.

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Garoor Takabbur | Arrogation Ke bare men kuchh aham Jankari in Hindi.

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया, जो गुरूर और तकब्बुर करता है, अल्लाह ताअला उस को जलील कर देता है, जिसके नतीजे में वह अपने आप को तो बहुत बड़ा समझता है, लेकिन लोगों की निगाहों में छोटा और जलील हो जाता है, यहां तक के कुत्ते और खिंजीर से भी बदतर लगने लगता है.

अगर लोग तुमसे मुतासीर हो रहे हैं तो तकब्बुर ना करो, शुक्र अदा करो अपनी रब का, जिसने तुम्हारे ऐब छुपाकर, तुम्हें लोगों में इज़्ज़त दिया.

यह हक़ीक़त है कि आजिज़ी में क़ामयाबी है, और तकब्बुर में नाकामी है.

शख्सियत में आजिज़ी ना हो, तो मालूमात में इजाफा ईल्म को नहीं,
बल्कि तकब्बुर को जन्म देता है.

इंसान पर कई तरह का बोझ होता है, हमारे ऊपर सबसे बड़ा बोझ तकब्बुर होता है, और हम यह जाने बगैर के अल्लाह के नजदीक कौन बड़ा है, कौन बुरा है फैसले खुद ही करते रहते हैं.

इंसानों उस दौलतपुर इतना तकब्बुर क्यों करता है, जो अगर हलाल हो तो हिसाब देना पड़ेगा, और अगर हराम हो तो आजाब भुगतना पड़ेगा.

ह़ज़रत उमर रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु फ़रमाते हैं, जिसने अपने रब के लिए झुकना सीख लिया,
वही इल्म वाला है, क्योंकि इल्म की पहचान अजीज़ी है, और जाहिल की पहचान तकब्बुर है,

अपने ऊपर तकब्बुर करके किसी को हकीर और कमज़ोर न समझो,
क्योंकि रास्ते में छोटा सा पत्थर भी आपको मुंह के बल गिरा सकता है.

ज़ुल्म और तकब्बुर का सजा दुनिया में जरूर मिलती है.

अल्लाह के रसूल ﷺ ने इरशाद फ़रमाया, के क़यामत के रोज़ अल्लाह कुछ लोगों को चीटियों की शक्ल में उठाएगा, लोग उन्हें अपने कदमों से कुचलेंगे, पूछा जाएगा यह चीटियों की शक्ल में कौन लोग हैं, तो उन्हें बताया जाएगा यह वह लोग हैं जो तकब्बुर करते थे.

तकब्बुर से अपना सर कभी बुलंद ना करो, क्योंकि जीतने वाला भी अपना मेडल सर झुका कर ही पाता है.

सब आप से बेहतर हैं/आप सबसे बेहतर हैं, लफ्जों का छोटा सा है फेर, और देखें कैसे आजिज़ी तकब्बुर में बदल जाती है.

अपनी गलती का कुबूल कर लेना, ये खुसूसियत है, इसमें आजीजी परवान चढ़ती है, और तकब्बुर कमज़ोर होता है.

तकब्बुर और गुरुर बहुत बुरी चीज़ है,
क्योंकि सबसे पहले शैतान तकब्बुर ही से गुमराह हुआ था.

अगर इंसान को तकब्बुर के बारे में अल्लाह की नाराज़गी और सजा का इल्म हो जाए, तो बंदा सिर्फ गरीबों और फकीरों से मिले, और मिट्टी पर ही बैठा करें.

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया, जिसके दिल में राई के दाने के बराबर भी तकब्बुर होगा, वह जन्नत में नहीं जाएगा.

दुनिया के हर मैदान में हार जीत होती हैं,
लेकिन अखलाक में कभी हार, और तकब्बुर में कभी जीत नहीं होती.

दो तरह से चीजें देखने में छोटी नज़र आती है,
एक दूर से दूसरा गुरुर से.

कभी भी अपनी कामयाबी को दिमाग में जगह ना देना, क्योंकि कामयाबी दिमाग में तकब्बुर पैदा करती है.

गुरुर एक बीमारी है जो किसी भी कमज़र्फ को लग सकती है.

गुरुर और गफलत का नशा, शराब से भी ज्यादा होता है, जो इस नशे में मुबतिला हो जाता है,
वो जल्दी होश में नहीं आता.

मत करना अपने आप पर गुरुर ऐ इंसान,
न जाने तेरे जैसे कितने, रब ने मिट्टी से बना कर, मिट्टी में मिला दिए.

शेख अब्दुल क़ादिर जिलानी फरमाते हैं, जब तक तेरा गुरूर और गुस्सा बाक़ी है, अपने आप को नेक लोगों में शुमार मत करो.

read more:-insaan kee itanee aukaat nahin ki vo kisee bhee insaan ko khareed sake.

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