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greedy crow | Hindi story | kahaniya | moral stories कौवा और कबूतर।

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greedy crow | Hindi story | kahaniya | moral stories कौवा और कबूतर।

एक समय की बात है एक कबूतर था। जो पेड़ पर अपने घोंसले में रहता था। वो पेड़ घर के रसोई की बहुत पास था। और उसमें काम करने वाले को कबूतर बहुत पसंद था। वह लोग उस को दाना डालते थे और अक्सर उसका ख्याल रखते थे। कबूतर अपनी जिंदगी से बहुत खुश था और उसको अपने घर से बहुत प्यार था। उस पेड़ के पास एक और पेड़ था जिस पर कौवा रहता था।
वो बहुत आलसी (greedy crow) था और सब को परेशान भी करता रहता था। वह दूसरे पक्षी का खाना ले लेता था और उसका घोसला भी खराब कर देता था। क्योंकि उसको खुद मेहनत करने में आलस आता था। एक दिन कौवे ने कबूतर को उस रसोई से खाना लाते देखा। उसने देखा उसमे काम करने वाले कबूतर के प्रति बहुत दयालु है। और उसे भी ऐसा आराम चाहिए था। फिर एक सुहानी सुबह का दिन था। जब कबूतर अपना घोंसला साफ कर रहा था और अपनी पसंदीदा धुन गुनगुना रहा था।जब वो घोंसले के लिए नहीं झारिया उठा रहा था। तभी उसका पैर घास में फंस गया। वह अपना पैर निकालने के लिए बहुत संघर्ष कर रहा था। फिर अचानक उसने ऊपर उस काले कौवे को देखा। फिर कौवा बोला हेलो दोस्त ऐसा लगता है कि तुम फंस गए हो, क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं May i Help you. कोई बात नहीं मैं ठीक हूं कबूतर बोला। अरे छोड़ो मैं तुम्हें बाहर निकलता हूं कौवा बोला। कौव्वे ने झाड़ियों को खींचा और कबूतर का पैर बाहर आ गया। शुक्रिया दोस्त तुम्हारा दिन खुशहाल रहे कबूतर ने कहा। तेरे जैसे ही कबूतर उड़ने लगा। कौवे ने उसे रोका रुको दोस्त शायद तुम मेरी मदद कर सकते हो। बस एक छोटी सी विनती है क्या हम दोस्त बन सकते हैं। फिर कबूतर बोला हां हम शायद हम दोस्त बन सकते हैं। अरे वाह अब दोस्त हम सब काम मिल बांटकर करते हैं। मैंने सुना है तुम्हारा घोसला बहुत बड़ा और सुंदर है। चलो वहां चलते हैं कौवा बोला। कबूतर थोड़ा हिचकीचाया मगर मान गया। दोनों ओर चले। जब कौवे ने घोसला देखा तो बहुत खुश हुआ कौवे को उस घोसले में बहुत आराम मिला। और उसने पूरा लुत्फ उठाने का सोचा। कबूतर ने उसे वहां रहने को और साथ में समय बिताने को कहा। जिससे वह खेल को और लोगों के बारे में गपशप कर सके। और जब वह खाने का समय हो गया और कौवे को अपने लिए भोजन तलाश करनी थी। और अपना ध्यान रखना था। कुछ दिन बाद कौवा बहुत परेशान हो गया। जब वह कबूतर को अपना सारा खाना खाते देखता वह चाहता था कि कबूतर उसके लिए भी खाना लेकर आए पर ऐसा ना हुआ। कौवा मांस खाना चाहता था। मगर कबूतर तो रसोई से सिर्फ दाने लेकर आता। कौवे से इंतजार नहीं हुआ और उसने तय किया कि रसोई में वह खुद खाना लाने जाएगा। एक दिन दोपहर को उसने चिमनी के रास्ते से रसोई में गया। उसे मछली बनने की खुशबू आई। और वो रोक ना पाया और उसने थोड़ा सा चखा और थोड़ा फिर वह लालची हो गया (greedy crow)। और सारी मछली खाना चाहता था। इसी दौरान वह थाली ज़मीन पर गिर गई। घर के लोगों ने आवाज सुनी और भागते हुए रसोई में आ गए। कौवा थर थर कांपने लगा। और भागने की कोशिश करने लगा। मगर बहुत देर हो चुकी थी। एक आदमी ने उसे पकड़ लिया। और दूसरे ने कटोरे से कौवे के सर पर मारा।

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सीख:- तो देखा लालच और स्वार्थ किसी को भी बर्बाद कर सकता है।

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