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hazrat dawood alaihissalam ka waqia| बारह हज़ार लोग बंदर बन गए,in Hindi

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hazrat dawood alaihissalam ka waqia|
बारह हज़ार लोग बंदर बन गए,in Hindi.

आज क़ुराने पाक के ऐसी वाक्य पढ़ना है, जिसमें 12000 बारह हज़ार लोग बंदर बन गए,
जी हां! हमारी इसी दुनिया में यह वाकया पेश आया, और इसकी तफ्सील क़ुराने पाक में मौजूद है, और यह कब हुआ, और क्यों हुआ, और ये किनके साथ हुआ.

रिवायत है कि हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम की कौम के 70000 सत्तर हजार आदमी उक़बा के पास समुंदर किनारे इला नामी गांव में रहते थे, यह लोग बड़ी खुशहाल जिंदगी गुजार रहे थे, इसमें ज़्यादा लोग जो थे वह मछुआरे थे.

अल्लाह ताअला ने उन लोगों को इस तरह इम्तिहान लिया के शनिच्चर के दिन मछली का शिकार उन लोगों पर हराम फ़रमाया दिया, और हफ्ते के बाक़ी दिनों में शिकार जो है वह हलाल फ़रमाया.

मगर इस तरह उन लोगों को आजमाइश में मुबतीला फ़रमाया के शनिच्चर (शनिवार) के दिन, और दिनों के मुकाबले में मछलियां ज़्यादा आती थी, और दूसरे दिनों में कम आती थी,

अब शैतान ने उनको यह हिला सुझाया (ideaदिया)के इस तरह करो के छोटे-छोटे नालियां दरिया से निकालकर हौज बना लो,
फिर उस हौज के उस नालियों को बंद कर देना, और इतवार वाले दिन शिकार कर लेना.

वह जो मछलियां है जो तुम छोटे-छोटे होज बनाए होंगे, उसके अंदर आकर कैद हो जाएगी.

भाइयों “अब आप ज़रा गौर करें तो basically यह भी तो एक शिकार ही है, मगर शैतान ने हिला सुझाया था, और यह अल्लाह की नाफरमानी वाला कौम था.”

और लोगों ने यही किया कि वो शैतान के बताए हुए इस मशवरे(idea) में आ गए.

अब इन लोगों में इन यहूदियों में तीन गिरोह (groups) बन गए.

कुछ लोग ऐसे थे जो शैतान के इस हिले से मना करते रहे, और नाराज हो कर इन लोगों से अलग रहे,
दूसरे नंबर पर वह लोग थे जो दिल से बुरा जानकर खामोश रहे, मगर नाफरमानों को मना न करते थे,
बल्कि मना करने वालों से ये कहते थे तुम लोग ऐसी कौम को नसीहत(समझना) क्यों करते हो के जिन्हें अल्लाह ताअला हलाक करने वाला या सख्त सजा देने वाला है,

यह वो लोग वो थे जो सर्कश थे, नाफ़रमान थे, जिन्होंने हुक्म ऐ खुदा बंदी की एलानिया नाफरमानी की, शनिवार के दिन शिकार करना मना था, मगर फिर भी हीले बहाने से उन्होंने शिकार करना शुरू कर दिया.

अब ये तीन किस्म के गिरोह उस कॉम के अंदर बन गए, अब इन नाफरमानों ने मना करने के बावजूद शिकार कर लिया.

तो अब मना करने वाली जमाअत ने क्या किया, उन्होंने कहा अब इन नाफरमानों से कोई मेल मिलाप नहीं रखेंगे, इन्होंने अल्लाह ताअला की हुकुम की अलल ऐलान नाफरमानी की है, इससे अलग रहेंगे.

तो उन्होंने क्या किया कि गांव को तक्सीम/बांट कर के बीच में दीवार बना दिया, अब अल्लाह के हुकुम को मानने वाले लोग एक तरफ हो गए, और नाफरमानों को दूसरी तरफ कर दिया,
अब दोनों तरफ आने जाने के लिए उस दीवार में दरवाजा भी बना लिया.

ह़ज़रत दाउद अलैहिस्सलाम के कॉम के ये लोग थे, अब जब आपको यह पता चला के कौम के हजारों लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अल्लाह ताअला की हुकुम की नाफरमानी की, और शनिच्चर वाले दिन भी शिकार किया है, आप अलैहिस्सलाम ने गजब नाक होकर शिकार करने वाले लोगों पर लानत फरमा दी, उसका असर यह हुआ, के एक दिन उन खता कारों में से कोई बाहर न निकला,
अब इस मेें 12000 हजार के करीब लोग थे, अब इधर वाले लोग दीवार पर चढ़कर यह देखने लगे कि माजरा क्या है, आज कोई भी वहां से इस तरफ नहीं आया, जब इन्होंने उन्हें दीवार पर चढ़कर देखा,
12 हजार के करीब जो लोग थे वह बंदर बन चुके थे, उनके चेहरे मस्ख हो चुके थे, अब जब दरवाजा खोला गया, अब दरवाजा जो खोला गया, तो वह मुजरिम जो थे जो बंदर बन चुके थे वो दाखिल हुए, अब उस में से कोई लिबास को सुंघता था, अपने रिश्तेदार के करीब भी आता था.

आप जरा सोचिए? जब किसी की शक्ल ही बदल गई हो तो कोई किसी को कैसे पहचानेगा?

हां वह बंदर पहचानते थे, इस तरफ वाले लोगों को उसके लिबास को सुंघकर रोते रहते, लेकिन इन्हें यह पता नहीं चलता था कि यह कौन शख्स हैं, मेरे खानदान का कौन सा फर्द है.

बहरेहाल मेरे भाइयों यह 3 दिन तक जिंदा रहे, लेकिन इन 3 दिनों में कुछ खा पी न सके, यूं ही भूखे प्यासे सारे हालाक(मर जाना) हो गए,

शिकार से मना करने वाला गिरोह, हालाकत से सलामत में रहा, और सही कॉल यह है के दिल से बुरा जानकर खामोश रहने वालों को भी अल्लाह ताअला ने इस अज़ाब से बचा लिया.

दोस्तों इस वाक्य से हमें सीखने को क्या मिला? पहले तो यह समझ में आता है कि वह लोग हैं जो अल्लाह के नबी की नाफरमानी करते हैं अगर नबी अलैहिस्सलाम उनसे नाराज़ हो जाए तो अल्लाह का गजब कैसा नाजिल होता है, इंसान बंदर तक बन सकता है, अब यहां इस कॉम के दिल दहलाने वाकया में तीन बातें बड़ी समझने वाली है,
एक तो अल्लाह के नबी के नाफरमानी,
दूसरा शैतान की हीले बहाने में आ जाना,
लोग कहते हैं जनाब सब चलता है,
अब जैसे आज के दौर में सुध का नाम इंटरेस्ट रख दिया गया,
हिला बनाकर बहाना बनाकर किसी चीज़ को जायज़ कर देना,
जब तक अलीम अहले सुन्नत हमारी रहनुमाई ना करें, अपने तौर पर डिसीजन न लिया करें कि यह भी ठीक है तो वह भी ठीक है,
शैतान तो चाहता ही यही है हम शरीयत की राहों से हटकर गुनाहों की राहों रास्ते पर आ जाए,

और दूसरी बात हमें यह समझ आ रही है, जब भी रोज़ी कमाई जाए, फकत रिज़्क़ ए हलाल की तरफ जाना चाहिए, अल्लाह की नाफरमानी करके जो रोज़ी कमाते हैं वह बर्बाद होते हैं, अल्लाह हम सबको अपने प्यारे हबीब ﷺ का फरमाबरदार बनाए,
रिज़्क़ ए हलाल कमाने वाला बनाए,
रिज़्क़ ए ह़राम से महफूज़ फरमाए,
हम सब के रिज़्क़ ए हलाल में खूब बरकत अता फरमाए,
क़ुरान ए पाक के नूर से हम सबके दिलों को मुनव्वर फरमाए, आमीन.

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