Honesty and perseverance can be successful in hindi.ईमानदारी का इनाम.

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ईमानदारी और लगन हो तो एक न एक दिन कामयाबी जरूर मिलती है.

ईमानदारी का इनाम.
ईमानदारी और लगन हो तो एक न एक दिन कामयाबी जरूर मिलती है इंसान को खुशी जरुर मिलती है.(Honesty and perseverance can be successful in hindi.ईमानदारी का इनाम.)
एक गांव में अब्दुल्ला नाम के एक पेंटर रहा करता था. वे बहुत ईमानदार था लेकिन बहुत गरीब होने के कारण वह घर घर जाकर पेंट किया करता था. उसकी आमदनी बहुत कम थी बहुत मुश्किल से उसका घर चलता था.पूरा दिन मेहनत करने के बाद भी वह सिर्फ दो वक्त की रोटी ही जुटा पाता था. वह हमेशा चाहता था कि उसे कोई बड़ा काम मिले जिससे उसकी आमदनी अच्छी हो पर वह छोटे छोटे काम भी बड़े लगन और ईमानदारी से किया करता था.
एक दिन उसे गांव के जमीदार ने बुलाया और कहा सुनो अब्दुल्ला मैंने तुझे एक बहुत जरूरी काम के लिए बुलाया है,क्या तुम वह काम करोगे? अब्दुल्ला ने कहा जी हुजूर जरूर करूंगा! बताइए क्या काम है! जमीदार ने कहा काम यह है कि तुम मेरी नाव पेंट करो, और यह काम आज ही हो जाना चाहिए. अब्दुल्ला ने कहा ठीक है यह काम आज ही कर दूंगा.
नाव पेंट का काम पाकर अब्दुल्ला बहुत खुश हुआ जमीदार ने कहा अब्दुल्लाह यह बताओ नाव पेंट करने का कितना पैसा लोगे अब्दुल्ला ने कहा वैसे तो इस काम के 12 सो रुपए लगते हैं लेकिन आपको जो अच्छा लगे दे देना.
हां ठीक है तुम्हें 12 सो मिल जाएंगे पर काम अच्छा होना चाहिए.
अब्दुल्ला ने कहा ठीक है हुजूर आप चिंता मत कीजिए काम बढ़िया ही मिलेगा.
जमीदार उसे अपने नाव दिखाने नदी किनारे ले जाता है नाव देखने के बाद अब्दुल्ला थोड़ा समय मांगता है और रंग लेने चला जाता है, सामान लेकर जैसे ही अब्दुल्ला आता है वह नाव को रंगना शुरू कर देता है.Honesty and perseverance can be successful in hindi.ईमानदारी का इनाम.
जब अब्दुल्ला नाव रंग रहा था तो उसने देखा नाव में तो छेद है! अगर इसे ऐसे ही पेंट कर दूंगा तो यह डूब जाएगी!पहले इस छेद को ही भर देता हूं.
और वह छेद को भर देता है और फिर नाव को पेंट कर देता है पेंट करने के बाद वह जमीदार के पास जाता है और कहता है हुजूर नाव का काम पूरा हो गया! आप चल कर देख लीजिए जमीदार कहता है ठीक है चलो फिर वे दोनों नदी किनारे पहुंच जाते हैं, नाव को देखकर जम्मेदार बहुत खुश हुआ और कहता है अरे वाह अब्दुल्लाह! तुमने तो बहुत अच्छा काम किया है.
और कहता है ऐसा करो तुम कल सुबह आकर अपना मेहनताना ले जाना अब्दुल्ला कहता है ठीक है और वे दोनों अपने अपने चला जाता है.
जमीदार के परिवार वाले अगले दिन उस नाव में बैठकर नदी के उस पार घूमने जाते हैं शाम को जमीदार का नौकर जैद जो उसके नाव को देख-रेख करता था वह छुट्टी से वापस आता है और परिवार को घर पर ना देखकर वह जमीदार से परिवार के बारे में पूछता है?
जमीदार उसे सारी बातें बताता है जमीदार की बात सुनकर जैद चिंता में पड़ जाता है उसे चिंतित देखकर जमीदार उससे पूछता है क्या हुआ जैद यह बात सुनकर तुम चिंतित क्यों हो गए? जैद कहता है सरकार नाव में तो छेद था जैद की बात सुनकर जमीदार भी चिंतित हो जाता है,तभी उसके परिवार वाले पूरा दिन मौज मस्ती कर के वापस आ जाते हैं,उसे सही सलामत देखकर जमीदार चैन की सांस लेता है.
फिर अगले दिन जमीदार अब्दुल्ला को बुलवाता है और कहता है यह लो अब्दुल्ला तुम अपना मेहनताना.
तुमने बहुत बढ़िया काम किया है मैं बहुत खुश हूं अब्दुल्ला पैसे लेकर गिनता है तो हैरान हो जाता है क्योंकि वह पैसे ज्यादा थे वह जमीदार से कहता है हुजूर आपने मुझे गलती से ज्यादा पैसे दे दिए.
जमीदार कहता है नहीं अब्दुल्ला यह मैंने गलती से नहीं दिए तुम्हारे मेहनत का ही पैसा है, अब्दुल्ला कहता है लेकिन हुजूर हमारे बीच तो 12 रु सौ की ही बात हुए थे,यह तो 6000 हज़ार है फिर यह मेरी मेहनत का कैसे हुआ?
जमीदार कहता है अब्दुल्ला क्योंकि तुमने बहुत बड़ा काम किया है,अब्दुल्ला कहता है कैसा काम हुजूर!
अब्दुल्ला तुमने इस नाव के छेद को भर दिया जिसके बारे में मुझे पता भी नहीं था अगर तुम चाहते उसे ऐसी भी छोड़ सकते थे या फिर उसके लिए अधिक पैसे भी मांग सकते थे लेकिन तुमने ऐसा बिल्कुल नहीं किया जिसकी वजह से मेरे परिवार वाले उस पर सुरक्षित सवारी कर सके अगर तुम उस छेद को ना भरते तो मेरे परिवार वाले डूब भी सकते थे आज तुम्हारी वजह से वह सुरक्षित है.
इसलिए यह पैसे तुम्हारे मेहनत और ईमानदारी के हैं अब्दुल्ला कहता है फिर भी हुजूर इस छेद को भरने के इतने पैसे तो नहीं बनते हैं जमीदार कहता है बस अब्दुल्लाह बस अब तुम कुछ मत कहो यह पैसे तुम्हारे ही हैं तुम इसे रख लो, जमीदार की बात सुनकर और पैसे लेकर अब्दुल्ला बहुत खुश हुआ और कहने लगा बहुत-बहुत धन्यवाद जमीदार साहब ऐसा कहकर वह खुशी खुशी वहां से चला गया.
तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है हमें अपना काम पूरी लगन और ईमानदारी से करना चाहिए
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