इंसान की ख्वाहिशात (desire)

इंसान की ख्वाहिशात (desire) कभी पूरी नहीं हो सकती, चाहे वो बादशाह ही क्यों ना हो, जितना भी पालें ख्वाहिशात (desire/चाह) और तमन्ना का प्याला हमेशा खाली रहता है” “और हमेशा और मिल जाए और मिल जाए इसकी तलब में खुला रहता है”. आज इसी के बारे में बात करेंगे तो चलिए शुरू करते हैं.

कहते हैं, किसी मुल्क का एक बादशाह बड़ा ही ताकतवर, सर बुलंद, शानो शौकत वाला था, उसे अपने azeem-o-shaan सल्तनत बड़ा ही नाज था, एक रोज वह अपने हुकूमत में घूमने के लिए निकला, वजीर और कुछ दरबारियों के इलावा कुछ बॉडीगार्ड भी साथ था,

वापसी में उसे महल के करीब एक फकीर नजर आया, जो फटे पुराने कपड़े पहने एक साइड में बेपरवाह बैठा हुआ था, बादशाह ने उस फकीर से कहा तुम अपनी कोई ज़रूरत बताओ जिसे मैं पूरा करूं, इस बात पर उस फकीर को हंसी निकल गई, बादशाह ने बड़ी सखती से पूछा इसमें हंसने वाली क्या बात है? अपनी ख्वाहिश बताओ मैं तुम्हें अपनी माल से मालामाल कर दूंगा, फकीर ने बादशाह से कहा कि बादशाह सलामत आप तो हमसे इस तरह कह रहे हैं जैसे आप हमारी हर ज़रूरत को पूरी कर देंगे,अब बादशाह ने कहा बेशक मैं तुम्हारी हर बात को पूरी कर सकता हूं, मैं बहुत ताकतवर बादशाह हूं, तुम्हारी कोई ख्वाहिश है कि नहीं होगी जिसे मैं पूरी न कर पाऊं,

फकीर ने अपनी झोली से एक भीख मांगने वाला कसकोल निकाला, और कहा अगर आपको अपनी दौलत पर इतना ही नाज है, तो इस प्याले को भर दीजिए, बादशाह ने हैरत से उस कसकोल के देखा, वह स्याह रंग का आम लकड़ी का खाली प्याला था, बादशाह ने इसारे से एक वजीर को कहा इस प्याले को सोने से भर दो यह भी क्या याद करेगा, के किस सखी बादशाह से पाला पड़ा था.
वजीर ने कमर से बंधी सोने की एक थैला प्याले में रख दी, खानखानाते सीक्के प्याले में गिरे और फौरन गायब हो गए, वजीर ने हैरत से प्याले में झांका फिर और एक थैली खोली और प्याले में डाल दी, इस बार भी सिक्के गायब हो गए,

बादशाह के इसारे पर वजीर ने सिपाहियों से कहा कि महल में रखी अशर्फियों की कुछ थैलियां ले आए, सिपाहियों ने अशर्फियां की थैली लाई और वह भी प्रमादे में रखी गई, और वह भी अशर्फियां गायब हो गई, और वह पियाला वैसा की वैसा खाली ही रहा यह माजरा देकर बादशाह ने खजाने में धरा मोतियों से भरा एक बोरी मंगवाई और वह भी खाली हो गई,
यह सब देखकर बादशाह का चेहरा लाल हो गया और वह जिद्दी लहज़ों में वजीर से कहा और बढ़िया मंगवा लो जो कुछ भी है सब इस पियाले में डाल दो, इसे हर हाल में भरना चाहिए, वजीर ने ऐसा ही किया, दोपहर हो गई और प्याला खाली का खाली रहा, क्योंकि जो चीज प्याले में डाली जाती वह फौरन ही खाली हो जाता, प्याला वैसा का वैसा खाली रहता.

अब शाम होने के आय अब बादशाह के चेहरे पर बेबसी झलकने लगी, शिकस्त के आलम में उसने आगे बढ़कर फकीर की हाथ थाम लिया और नजरें झुका कर उससे माफी मांगी, और कहां ऐ मर्दे दरवेश अब तुम ही बताओ, इस प्याले में क्या राज़ है जो ये भरता ही नहीं,
फकीर ने संजीदगी से जवाब दिया, दरअसल इसमें कोई खास राज की बात नहीं दरअसल यह प्याला इंसानी ख्वाहिशात (चाह) से बना हुआ है,
इंसान की ख्वाहिशात(desire) कभी पूरी नहीं हो सकती, चाहे जितना डाल दो ख्वाहिशात(चाह) और तमन्ना का प्याला हमेशा खाली रहता है” “और हमेशा और मिल जाए इसकी तलाब में खुला रहता है”.

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