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Jaisi Karni Waisi bharni | जैसी करनी वैसी भरनी कहानी हिंदी in Hindi.

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Jaisi Karni Waisi Bharni | नाबीना का मज़ाक ले डुबा | सजा | in Hindi.
आज आप को एक शादी शुदा मर्द का घटना सुना रहा हूं, यह जो शख्स था बड़ा ही दोस्तों में रहने वाला, रात रात भर घर लेट आने वाला वह शख्स था।
मस्ती मज़ाक बहुत करता था। लोगों के नकलें उतारा करता था, उसका मज़ाक उड़ाया करता था। और युं उसकी रात का एक हिस्सा निकल जाता। दोस्त भी इसके जैसे ही थे।

अंधा आदमी धराम से ज़मीन पर गिरा :

एक दिन वो घर की तरफ जा रहा था, उसने देखा एक अंधा आदमी लोगों से भीख मांग रहा है, उसने उस अंधे आदमी के आगे अपना पांव रखा, जिसे अंधा आदमी धराम से ज़मीन पर गिरा उसको चोट लगी, उस अन्धे आदमी ने कुछ कहना शुरू किया।
अंधा आदमी उसको कुछ बोल रहा था, औ वह शख्स हंस रहा था। उसको बड़ा मजा आया।

वो मज़ाक उड़ाने वाला शख्स जैसे ही घर पहुंचा तो देखा उसकी बीवी बहुत परेशान थी। उसकी बीवी पेट से थी, लगता है delivery का वक्त नजदीक आ गया था।

वो शख़्स बोला मैं उसको लेकर अस्पताल रवाना हुआ अस्पताल जैसे ही पहुंचा तो मेरी बीवी को वार्ड में ले गई, और मैं थोड़ा बाहर खड़ा रहा,
थोड़ी देर हो गई अब मुझे सुस्ती होगइ नींद आ रही थी। मैंने अस्पताल में अपना नंबर दिया और सोचा जब फोन आएगा तो मैं वापस आ जाऊंगा। और मैं घर की तरफ रवाना हो गया,
घर की तरफ जा रहा था कि रास्ते में इसको फोन आ गया के के आप के यहां बेटे की पैदाइश हुई है आप वापस आ जाएं।

वो वापस आया खुशी खुशी और अस्पताल पहुंचते ही अपने बीवी के पास जाने की कोशिश की तो उसे कहा गया कि पहले आप डॉक्टर से मिल लें, फिर आप अपने बीवी बच्चों से मिल लीजिएगा।

Jaisi Karni Waisi bharni:

वो डॉक्टर साहब के पास पहुंचा जी डॉक्टर क्या बात है। डॉक्टर ने उस शख्स से कहा आपका जो बच्चा पैदा हुआ है ये अन्धा है
ना बिना है।
जैसी ही डॉक्टर ने कहा, मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। और फौरन मुझे वो रात वाला वह मज़ाक याद आ गया। जो मैंने अंधे को गिराया था। और अंधे का जो मैंने मजाक उड़ाया था। मुझे बस ऐसा लगा कि बस कुछ हो गया, मैंने बहुत बड़ी गलती कर ली। Jaisi Karni Waisi bharni. खैर हम घर आ गए।

Jaisi Karni Waisi bharni

जब घर आए तो सच पूछो तो मेरे इस नाबीना बेटे में कोई दिलचस्पी रही नहीं, मैं यह नहीं कहता कि उसे नफरत करता था। लेकिन मुझे उससे मोहब्बत भी नहीं थी। मैं अपनी उसी रूटीन में था, रात को देर से आता, और यूं मेरी चंद साल गुजर गए मेरे और दो बेटे हो गए मैं उस दो बेटों से मोहब्बत करता था वह नॉर्मल थे, यह नाबीना था।

फिर आहिस्ता आहिस्ता उसने चलना शुरू किया, उसकी चाल कुछ अलग था फिर पता चला कि यह नाबीना के साथ साथ पांव से माजुर भी है।
खैर वक्त गुजरता गया। और बच्चे बड़े होते गए।

एक दिन मैं सुबह जल्दी उठ गया मुझे वालीमें (दावत)में जाना था। जैसे मैं तैयार होकर जाने लगा तो मुझे उसी नाबिना बेटे की रोने की आवाज आई, मैंने कहा क्यों रो रहे हो, वो बोला भाई नहीं आया, मैं बोला भाई नहीं आया तो क्यों रो रहे हो, उसने कहा मैं हर जुम्मा को मस्जिद जाता हूं, और जल्दी चला जाता हूं ताकि मुझे पहली सफ मिल जाए
और मैं अल्लाह की इबादत कर सकूं, इतनी देर हो गई है भाई अभी तक आया नहीं है। मुझे लेकर कब जाएगा, मैं मस्जिद कब पहुंच लूंगा। कहीं ऐसा ना हो यह जुम्मे का दिन जो इबादत का दिन है वो कहीं घर बैठकर निकल ना जाए।

बाप बोला मैं तो इनकी बात सुनता रह गया! बाप बोला तुम इसलिए रो रहे हो कि तुम्हें जुम्मा दीन मस्जिद जल्दी जाना था? बेटा बोला हां मैं इसलिए रो रहा हूं।

बाप कहता है कि इसकी ये आवाज ने, इसकी यह बात ने मुझे झकझोर कर रख दिया। मेरा ये नाबिना बेटा इसको मस्जिद जाने का इतना शौक है! मैं इसकी इन बातों से मुतासिर हुआ।

मैंने इसको कहा चलो एक काम करते हैं, तुम्हें मैं मस्जिद ले जाता हूं। मस्जिद पहुंचे, नमाज पढ़ी,
मैंने बड़ी अरसे के बाद नमाज़ पढ़ी मेरे दिल की दुनिया बदल रही थी। मेरा जेहन बदल रहा था। मेरी सोच बदल रही थी। मेरी कैफियत बदल रही थी। मैं खुद भी नहीं समझ पा रहा था कि मेरे साथ हो क्या रहा है। यह बच्चा जिसे मैंने कभी देखना पसंद नहीं किया आज मैं इसका हाथ पकड़ कर मस्जिद में लेकर आया, और आज मैं इसके साथ बैठा हूं, और इसके साथ जुम्मा की नमाज़ अदा की है वाह! जैसे ही नमाज पूरी हुई, मैंने कहा अब क्या करना है, बेटा बोला अब मुझे कुरान चाहिए, नवीना हो बेटा तुम कुरान को क्या करोगे?मैं ने कुरान दिया, मैंने बैहस नहीं किया, मैं तो पहले ही मुतासिर हो चुका था इससे,
कुरान लिया उसको कुरान दिया। इसने क़ुरआने करीम खोला और मुझे कहा कि अब्बा देखिए सुरह कहफ कहां है? मैंने सुरह कहफ निकाल कर उसको दी, उसने सुरह कहफ पढ़ना शुरू कर दिया। मैं समझ गया कि मेरा बेटा सुरह कहफ का हाफिज है। इसने सुरह कहफ को जुबानी याद की है। उसने सुरह कहफ पढ़ी और मुझे कुरान दिया, और कहा अब्बु अब आप कुरान पढ़ो, मैंने क़ुरान लिया और क़ुरान पढ़ना शुरू किया। जैसे-जैसे क़ुरान पढ़ता गया मेरे दिलो-दिमाग का जंग धुलता गया। मुझे मेरी गफलतें, मस्तियां, मेरी छेड़खानियां, मेरे गुनाह, मेरी बदकारियां, याद आती थी, और मेरी आंसू नहीं रुकते थे। अब मुझे कुछ नहीं चाहिए था। मुझे सिर्फ और सिर्फ मेरे बेटे से मोहब्बत हो गई थी। अब मैं दिन रात मेरे बेटे को लेकर मस्जिद जाऊं-आऊं नमाज़ पढ़ुं, कुरान पढ़ुं, मैंने सारे पिछले दोस्त छोड़ दिए, उसी दोस्तों की गैदरींग के वजह से ही मैंने कभी अपने घरवार के लिए संजीदा न हो सका। मैंने अपने इलाक़े के मस्जिद के नेक मुत्तक़ी, परहेजगार लोग थे, मैंने उससे दोस्ती कर ली। मेरे इस नाविना बेटे ने मेरी ज़िंदगी को बदल कर रख दिया। मेरी कैैफियत यह हो गई के एक वक्त था कि मुझे ये याद नहीं था के आखरी बार मस्जिद में हाजरी दी कब थी। और आज मेरी कैफीयत यह है कि एक भी नमाज़ कजा नहीं हो रही है।

उसने मेरे जाहिर व बातीन को नूर नूर कर दिया:

कुछ हफ्तों के लिए मैं क़ाफले में चला गया, फिर वापसी हुई मेरी घर पर जैसे ही घर में दाखिल हुआ मुझे था कि मेरा वो नाविना बेटा मेरा इस्तकबाल करेगा, मेरा अब्बु आ गए। लेकिन मेरे दूसरे बेटे मुझसे चीमट गए, मगर मेरा नाविना बेटा मुझे नजर ना आया। मेरी घबराहट बढ़ गई। मेरा बेटा कहां है। मेरा वो नूरे नज़र कहां है, जिनकी आंखों का नूर तो नहीं था, लेकिन उसने मेरे जाहिर व बातीन को नूर नूर कर दिया। मैंने अपनी बीवी से पूछा कि मेरा बेटा कहां है। फिर मेरे दूसरे बेटे ने धीमी आवाज में मुझसे कहा कि अब्बा वो तो अल्लाह को प्यारा हो गया। बस ये सुनते ही मेरी तो चीख निकल गई। मैंने कहा कैसे? तो पता चला कि इसे दिल दो हफ्ते पहले बुखार हुआ और बुखार बढ़ता चला गया बढ़ते बढ़ते काबू ना हो सका इलाज भी किया लेकिन वो बुखार ऐसा चढ़ा के कुश्ती हो तो निकल गई और वो दुनिया से रुखसत हो गया।

सबक़: दोस्तों हमें भी किसी की मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए। वरना Jaisi Karni Waisi bharni हो सकता है।

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