Koi bhi Insan Kisi ko beizzat Karne par qudrat nahi rakhta, in Hindi.

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कोई भी इंसान किसी को बेज्जती करने पर कुदरत नहीं रखता, in Hindi.

इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु के ख़िदमत में एक शख्स आया, और दस्तेअदब को जोड़कर अर्ज़ करने लगा, या अली एक शख्स ने मेरी बेइज्जती की है, आप मुझे बताएं मैं इस बेइज्जती का बदला कैसे लूं?
बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया ऐ शख्स किसने कहा ह के इंसान के अख्तियार में इज्जत और बेइज्जती करना है?
कोई भी इंसान किसी को बेज्जती करने पर कुदरत नहीं रखता.
तो वो कहने लगा या अली उसने मेरी तोहीन की, शर्मिंदा किया, और आप फरमाते हैं कि इंसान बेइज्जती कर ही नहीं सकता, ऐसा कैसे हो सकता है?
बात जब यहां तक पहुंची तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया ऐ शख्स
इंसान बचपन से, दिमाग में एक सोच रखता है के जो उसके फैसलों और शख्सियत को तारीफ बख्शे तस्लीम करें, तो इसी बात में वह अपनी खुशी महसूस करता है, और इसी खुशी को वो इज्जत समझने लगता है.
और जिस इंसान से उसे तारीफ और तस्लीम की सिफत ना मिले, तो वो यह समझता है कि मेरी इस जगह बेइज्जती हो गई.
असल में इस चीज को इज्जत या बेइज्जती नहीं कहते.
ये तो सिर्फ तुम्हारी ही खुशी थी जो तुम्हारी वजूद में रहती है.
जिससे तुमको खुशी मिलती है, उसे तुम इज्जत समझते हो.
और जो तुम्हारी बात नहीं मानता तुम्हें तस्लीम नहीं करता, तो तुम उस ना खुशी को बेज्जती समझते हो.
ऐ शख्स याद रखना इज्जत और जिल्लत अल्लाह के हाथ है.
अल्लाह ने इस इज्जत और जिल्लत को इंसान के आमाल के पशे पुस्त रखा है.
कोई कुछ भी कहे कोई कुछ भी करें अगर तुम्हारे आमाल अल्लाह के नजदीक अच्छे हैं तो यकीन रखो तुम्हारी कोई बेइज्जती नहीं कर पाएगा.
क्योंकि तुम्हारी इज्जत का जामीन तुम्हारा खालिक़ है.
और अगर तुम्हें अपनी इज्जत का फिक्र है तो तुम अपने आमाल की फिक्र करो, अपने किरदार की फिक्र करो, जितना अजीम तुम्हारा किरदार होगा, जितने आला तुम्हारे औसाफ होते जाएंगे, उतने ही अल्लाह तुम्हारी इज्जत बढ़ाता जाएगा.
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