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आबीद और कुत्ते का सबक़ आमोज़ कहानी, Lesson of Abeed and dog in hindi.

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आबीद और कुत्ते का सबक़ आमोज़ कहानी, Lesson of Abeed and dog in hindi.

हम तुझी को पूजे और तुझी से मदद चाहें.
न मोह़ताज रख तू जहां में किसी का.
हमें मुफलिसी से बचना या इलाही.
हमें ज़िन्दगी के कई मोड़ पर इम्तिहानों का सामना करना पड़ सकता है.
और हमें चाहिए कि इस इम्तिहान के दौर में
हम सब्र का दामन मज़बूती से थामे रखें.
बेशक अल्लाह अपने बंदों की मदद फरमाता है.
तो चलिए शुरू करते हैं.
एक आबिद पहाड़ों में अल्लाह की इबादत मुद्दतों से किया करता था.
और उसके खाने का इंतजाम अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने अनार के जरिए रखा था.
जिस जगह पर वह इबादत किया करता था,उसी के पास में अल्लाह ने एक अनार का दरख्त (पेड़) भी पैदा किया था.
और रोज़ाना उस दरख्त में तीन अनार उगते थे और वह आबिद रोज़ाना अनार को खा लेते थे, और अल्लाह की इबादत में मशगूल हो जाते थे.
इसी तरह काफी मुद्दतों चलता रहा,उस पेड़ पे आनार उगता और वह खाता और इबादत में मशगूल हो जाता.इसी तरह कई मुद्दतें गुज़र गए.
कई मुद्दतों के बाद अल्लाह ने उस बंदे से उस आबीद से इम्तिहान लिया और उसे अनार देना बंद कर दिया गया.
जब उसे पहले दिन आनार नहीं मिला तो उसने सब्र किया.
इसी तरह फिर दूसरे दिन भी उसे आनार नहीं मिला उसने फिर सब्र किया.
फिर तीसरे दिन अल्लाह ताअला उसे आनार से महरूम रखा,उसका रब इम्तिहान ले रहा था.
अब वो भूख से निढाल होकर परेशानी में मुब्तिला होकर बहुत ही ज्यादा घबराहट महसूस करते हुए वह पहाड़ से नीचे उतर आता है.
और नीचे आने के बाद वह भीख मांगने के लिए वह एक यहूदी के यहां पहुंच जाता है.
उसने दरवाज़े पर दस्तक दी,और कहा मुझे कुछ खाने के लिए दे दो उस यहूदी ने उसे चार रोटीयां दे दिए.
और वह रोटीयां लेकर पलटता है तो उस यहूदी का कुत्ता उस पर भौकना शुरु कर देता है.
उस कुत्ते को भौकता देखकर वह एक रोटी दे देता है वह कुत्ता रोटी खा लेता है.
उसके बाद फिर भौकना शुरु कर देता है.वह फिर से एक रोटी दे देता है वह कुत्ता रोटी खा लेता है.
इसी तरह वह सारा रोटीयां खा लेता है लेकिन फिर भी भौकना बंद नहीं करता है.
आखिरकार वह आबीद कहता है,तुझे शर्म नहीं आती मैं तेरे मालिक के दरवाज़े पर भीख मांगने के लिए आया था.
तेरे मालिक ने मुझे चार रोटीयां दी और वह चारों रोटीयां तूने खा ली, फिर भी भौंकना बंद नहीं किया.
दोस्तों वह कुत्ता ने कहां हां मैं बेशर्म हूं लेकिन तुझसे ज्यादा बेशर्म नहीं.
तेरा रब ने तुझे बगैर किसी मशक्कत के बगैर किसी मेहनत के तुझे का अनार के दाना खिलाता रहा.
लेकिन सिर्फ चंद दिनों तेरे रब ने अनार नहीं दिए तो तू अपने रब की दुश्मन के दरवाज़े पर भीख मांगने आ गया. मैं बेशर्म हूं लेकिन तुझसे ज्यादा बेशर्म नहीं.
दोस्तों वह कुत्ता उस आदमी को सबक़ सिखा रहा है,और बता रहा है.
मैं तो बेशर्म हूं.
लेकिन फर्क देख मैंने उस से रोटियां ली, जिसने मेरे मालिक के दरबाज़े पर भीख लिया है.
लेकिन तू ऐसा बेशर्म है.
जो अपने मालिक के दुश्मन के दरवाज़े पर आकर भीख मांग रहा है.तुम्हारा रब तुझे मुद्दतों से खिलाता रहा.
लेकिन फिर भी तू अपने रब के दुश्मन के दरवाज़े पर भीख मांगने आ गया.
दोस्तों यह
वह सिग्नल है जिसके जरिए से अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने बंदों को अपने रास्ते पर लाता है.
अगर उनके कदम लड़खड़ा जाए, अगर वह बहक जाए,अगर हक़ीक़त के रास्ते से दूर भी हो जाए तो अल्लाह अपने मुकर्रब बंदों को इस सिग्नल के ज़रिए से वापस अपने रास्ते पर लाता है.
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