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तोते के अंडे और शिकारी की कहानी | Panchtantra Story in Hindi | Parrots

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तोते के अंडे Panchtantra Story in Hindi | पंचतंत्र की कहानी तोते के अंडे और शिकारी।

बहुत समय पहले की बात है। तोते का बड़ा सा झुंड पीपल के पेड़ पर रहता था। मगर वे सब तोते बहुत उदास रहते थे। क्योंकि पास का एक शिकारी अक्सर आकर उनके छोटे-छोटे अंडों को चुराकर ले जाते था। शहर में जाकर उन्ही अंडों से जब बच्चे निकलते तो उन्हें वो बेच देता था। एक दिन एक तोते ने कहा मेरा इस पेड़ पर रहने का दिल नहीं करता है। वह शिकारी जब चाहे आकर हमारे अंडों को चुरा कर ले जाता है। हां अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमारा वन्स खतरे में है।
हां दोस्त तुम ठीक कहते हो अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमारा वन्स एक दिन समाप्त हो जाएगा।
और हम सब अकेले हो जाएंगे। फिर अचानक शिकारी के ज़ोर से चिल्लाने की आवाज आई, बचाओ बचाओ बचाओ कोई तो मेरी जान बचाओ। एक तोते ने कहा अरे यह तो उसी शिकारी की आवाज़ है। लगता है या फिर से अंडों को चुराने आ रहा है। मगर यह बचाओ बचाओ क्यों कह रहा है। आखिर क्या हो सकता है। आखिर क्या बात है। एक तोते ने कहा नहीं नहीं लगता है या किसी मुसीबत में है। हमें इसकी मदद करनी चाहिए। दूसरे तोते ने कहा मैं इस शिकारी की कोई मदद नहीं करूंगा। हमारे दुखों का कारण यही तो है। मिट्ठू तोता जो दिल का बहुत अच्छा था। उसे शिकारी पर बहुत दया आई। मिट्ठू तोते ने कहा मैं उसकी मदद जरूर करूंगा। मिट्ठू तोते के अलावा कोई भी शिकारी कि मदद करने के लिए नहीं गया। मिट्ठू तोता जब शिकारी की मदद करने पहुंचा तो उसने देखा शिकारी दर्द से तड़प रहा है और उसके पैर पर सांप के दांतों के निशान हैं। लगता है शिकारी को सांप ने काटा है। मुझे इनकी जान बचानी होगी। मिठू तोता तुरंत बैध जी के पास गया और उन्हें लेकर शिकारी के पास आया। बैध जी ने तुरंत सारा जहर निकाल दिया। शिकारी ने कहा धन्यवाद बैध जी आपने मेरी जान बचा ली। धन्यवाद मेरा नहीं मिट्ठू तोते करो। इसने समय रहते मुझे बुला लिया। शिकारी मिट्ठू तोते से अपने किए का माफी मांगता है। और कहता है वे अब कभी उनके अंडे को नहीं पकड़ेगा।

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Panchtantra Story in Hindi | Parrots | तोते के अंडे और शिकारी की कहानी in video

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