दो मित्र और भालू की कहानी in hindi

दोस्ती उससे करो जो सच्चा हो, झूठे दोस्त सिवाय दुख तकलीफ के कुछ नहीं देते, और मुसीबत आने पर साथ छोड़ देते हैं.

एक समय की बात है “दो जिगरी दोस्त थे एक का नाम रॉन दूसरा का नाम जॉन था.उन्होंने दुनिया घूम घूम कर दुनिया देखने का इरादा जाहिर किया, और एक दिन जंगल जाने का फैसला कर लिया,जंगल बहुत घना था वे जानते थे यह बहुत खतरनाक है कभी भी कुछ भी हो सकता था, इसीलिए दोनों ने आपस में यह फैसला किया कि हम दोनों कभी भी एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगे, चाहे कैसा भी मुसीबत आ जाए.”

जंगल बहुत खतरनाक था इसलिए वे दोनों ने एक दूसरे से वादा किया चाहे कैसा भी मुसीबत आ जाए हम दोनों एक दूसरे का साथ रहेंगे और साथ नहीं छोड़ेंगे.

ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे…तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ ना छोड़ेंगे मेरी… एकाएक उन्होंने एक तेज गरज़दार आवाज सुनी देखा एक बहुत बड़ी भालू उसकी तरफ आ रहा है वे दोनो डर के मारे कांपने लगे रॉन तेजी से करीब के दरख्त (पेड़) पर चढ़ गया.और जॉन नीचे रह गया वह दरख़्त (पेड़)पर चढ़ना नहीं जानता था, तो उसने रौन से पूछा क्या तुम मुझे पेड़ पर चढ़ने में मदद कर सकते हो वरना भालू मुझे खा जाएगा मेहरबानी करके मदद करो.

रॉन ने कहा मैं नीचे नहीं अा सकता भालू इधर आ रहा है और इधर छिपने की कोई जगह भी नहीं है तुम जाओ कहीं और जाकर छिप जाओ रॉन जॉन की मदद नहीं कर सका.

लेकिन जॉन(intelligent) एक होशियार लड़का था उसने अपने स्कूल में उस्ताद से सुना था के भालू मुर्दा को नहीं खाता और उसने अपने दिमाग से काम लिया और सांस रोककर सीधा जमीन पर लेट गया बिल्कुल इस तरह जैसे कि मुर्दा.

भालू ज़मीन पर पड़े लड़के के करीब आया और भालू ने उसके कान सूँघा और धीरे से वहां से चला गया क्योंकि भालू मुर्दा मखलूक को हाथ नहीं लगाता.

भालू के जाने के बाद दोस्त दरख़्त से नीचे आया और उसने अपने दोस्त जॉन से पूछा भालू ने तुम्हारे कान में क्या कहा?

जॉन बोला भालू मुझे नसीहत कर रहा था कि झूठे दोस्त पर ऐतबार मत करना,वो मुश्किल घड़ी में तन्हा छोड़ देता है,सच्चा मित्र वही है जो संकट के समय में भी साथ दे.

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2 COMMENTS

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