What’s the difference between just and unjust relationship? in hindi.

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What’s the difference between just and unjust relationship? in hindi.जायज़ और नाजायज़ रिश्ते मे क्या फर्क है?

एक मर्तबा इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु रास्ते से गुज़र रहे थे, देखा एक शख्स किसी नामेहरम से बात कर रहे थे, इमाम अली ने उसे देखा और तन्हाई में उस शख्स को बुला के नसीहत फरमाई,

आप ने फ़रमाया “ऐ शख्स याद रखना जो इंसान किसी नामेहरम से नाजायज़ रिश्ता रखें, अल्लाह के कवानिन (कानून)को झूठ लाए, तो उसे अल्लाह के रसूल ﷺकी सफाअत नसीब नहीं होगी.”

तो उसने दस्तेअदब को जोड़कर अर्ज़ किया या अली मैं उस लड़की से प्यार करता हूं, और प्यार करना कोई गुनाह नहीं, बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया “ऐ शख्स इस जमीन पर कुछ रिश्ते जायज़, और कुछ रिश्ते नाजायज़ होते हैं, और उस जायज़ और नाजायज़ रिश्ते की पहचान अल्लाह ने इंसान के जमीर में रख दिए है.”

उसने कहा या अली वो कैसे? तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया “जायज़ रिश्ते की पहचान यह है के इंसान उस रिश्ते को फक्र से बताता है, उसे बताते वक्त उसका सर बुलंद रहता है, और नाजायज़ रिश्ते की पहचान यह है के उस रिश्ते कोई इंसान सरेआम बयान नहीं कर सकता, उसे छुपाता है, क्योंकि अल्लाह ने इंसान के जमीर में सही और गलत का फर्क रख दिया.”

बताओ यह रिश्ता तुम्हें सही लगता है तो तुम छूप के क्यों मिल रहे हो, वो नजरें झुकाने लगा, तो आपने फ़रमाया ऐ शख्स याद रखना जो इंसान इस फर्क को महसूस करके भी झूठलाता है, तो अल्लाह उसकी नेकियां और इबादत कुबूल नहीं करता.

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