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When and how did grapes grow|अंगूर को कब और क्यों नाज़िल किया गया.

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When and how did grapes grow in hindi अंगूर को कब और क्यों नाज़िल किया गया.

एक मर्तबा एक शख्स ह़ज़रत इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु के खिदमत में आया और दस्तेअदब को जोड़कर अर्ज़ करने लगा या अली मैं हमेशा उदास रहता हूं दौरे गुजिस्ता की यादें मुझसे जुदा नहीं होती बेसुकून सा रहता हूं.
बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया अल्लाह ने इंसान के लिए इस ज़मीन पर हज़ारों नेमतें को उतारा, उसमें से एक अंगूर है, तुम कोशिश करके मगरिब के नमाज़ के बाद थोड़ी सी अंगूर खाया करो, अल्लाह के करम से तुम्हें सुकून मिलेगा.
उसने कहा है या अली आप फ़रमाते हैं अल्लाह ने हर चीज़ को इंसान के लिए नेमत बना कर भेजा, तो यह अंगूर कब और कैसे नाज़िल हुआ ( When and how did grapes grow)
बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया, ऐ शख्स जब आदम को जन्नत से निकाला गया तो आदम अलैहिस्सलाम बार-बार रोते थे, अपनी गलती पर पशेमान होते थे, ज्यादा रोने की वजह से आदम की आंखों से खून निकलने लगा.
तो अल्लाह ने जिब्रील से कहा जाओ जन्नत से कुछ अंगूर लेकर आदम के पास जाओ और उनसे कहो कि अंगूर के रस में अल्लाह ने सुकून रखा है. आदम अलैहिस्सलाम अंगूर खाते थे और उसे सुकून मिलता था, और इस तरह यह जन्नती गिज़ा जमीन तक आ पहुंची.
और जब नूह अलैहिस्सलाम की कौम उसे पत्थर मारती थी और नूह अलैहिस्सलाम बार बार तबलीग करने के बाद अफसुर्दा हो जाते थे,तो अल्लाह फरमाते थे हमने इस ज़मीन पर इंसान को सुकून देने के लिए अंगूर नाज़िल किए,
तुम अंगूर खाया करो तुम्हारे दिल को सुकून मिलेगा.
अल्लाह ने अंगूर के रस में इंसान के वजूद का सुकून रखा है, जो इंसान परेशान रहता है, उदास रहता है, उसके इस मर्ज की दवा अल्लाह ने पहले ही इस जमीन पर रख दी.
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