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Why are not we happy? Some information about this in hindi.

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हम खुश क्यों नहीं है?इसके बारे में कुछ जानकारी.

इस दुनिया में उमुमन यह देखा जाता है,कि चाहे अमीर हो या गरीब सबकी जिंदगी एक बेचैनी के साथ गुजर रही है.
हर कोई अपनी जिंदगी में सुकून चाहता है.लेकिन फिर भी उसें सुकून की दौलत नहीं मिल पा रही है. ऐसा क्यों होता है?आईए एक छोटी सी कहानी पढ़ते हैं. जिसे समझने में आसानी हो होगी, के हम खुश क्यों नहीं है?
(Why are not we happy? Some information about this in hindi.)
किसी मुल्क में एक बादशाह था, उसके पास हर चीज़ मयस्सर थी,लेकिन फिर भी बहुत नाखुश था. वह अपनी जिंदगी सुकून से नहीं गुजार पा रहा था.
एक दफा बादशाह अपने महल में टहल रहा था, कि उसकी नज़र वहां पर काम करने वाले नौकर पर पड़ी.वह खुशी से से गुनगुनाते हुए अपना काम कर रहा था.
बादशाह या देखकर सोचने लगा मेरे पास सब कुछ है,लेकिन मैं फिर भी खुश नहीं हूं.
यह नौकर है इसके पास कुछ नहीं है फिर भी खुश है.
बादशाह ने हुक्म दिया इस नौकर को मेरे पास लाया जाए, बादशाह के हुकुम पर उस नौकर को बादशाह के पास पेश किया गया,बादशाह ने उसे डरा हुआ देखा तो बोला डरो मत मैं तुझे कुछ नहीं करूंगा.
बादशाह ने कहा मैं तुमसे एक सवाल का जवाब चाहता हूं?के तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है फिर भी तुम खुश कैसे हो तो नौकर ने कहा मैं यहां पर एक मामूली सा नौकर हूं.
और मैं यहां काम करता हूं और काम करके घर चला जाता हूं. आपके कर्म से खाने के लिए खाना और रहने के लिए छत मिल जाती है.
मुझे और मेरे खानदान को इससे ज्यादा किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं इस पर खुदा का शुक्र करते हैं.
बादशाह ने जब नौकर की बाय सुनी लेकिन उसको कुछ समझ ना आया, वह नौकर के बात पर मुत्मईन न हुआ.
और अगले ही दिन बादशाह ने एक सलाहकार को बुलवाया और उसको अपनी परेशानी और नौकर का सारा वाकया सुनाया.
बादशाह ने उससे कहा इसकी सही वजह बताओ कि मैं खुश क्यों नहीं हूं.(Why am i not happy)
मुझे सुकून क्यों मयस्सर नहीं है.उसने कहा ऐ बादशाह शायद नौकर ने 99 का खेल नहीं खेला है.इसलिए वह इतना खुश रहता है.
बादशाह ने कहा यह 99 का खेल क्या है. सलाहकार ने कहा आज रात आप एक पोटली में 99 रुपए भरकर नौकर के घर के सामने रख दें.
फिर आपको सारा खेल समझ आजाएगा.
बादशाह ने ऐसा ही किया सुबह जब नौकर उठा और दरवाज़ा खोला तो उसके सामने सिक्कों से भरी पोटली पड़ी थी.
नौकर ने पोटली उठाया और अंदर ले गया,इतने सिक्के देखकर वह हैरान रह गया,और वह खुशी से पागल हो रहा था.
नौकर ने सिक्कों को जल्दी से गिनना शुरू किया वह सिक्के 99 निकले नौकर ने सोचा शायद गिनने में गलती हो गई है,यह 100 सिक्के होने चाहिए.
उसने दोबारा सिक्के को गिनना शुरू किया लेकिन सिक्के 99 ही थे.
वह सोचने लगा इसमें ज़रूर 100 सिक्के ही होंगे एक सिक्का कहीं गिर गया है.
उस दिन नौकर काम पर नहीं गया,और सिक्का इधर-उधर ढूंढता रहा.
रात में उसने कहा वह 100 सिक्के के पूरे करके ही रहेगा चाहे उसको मेहनत करके ही कमाए.
उसके बाद वह रात-दिन मेहनत करने लगा और अपने खानदान वालों से भी कहने लगा ताकि जल्दी से जल्दी 100 सिक्के मुकम्मल हो जाए.
उसके बाद नौकर पहले जैसा ना रहा वह रातों को सो नहीं पाता था कि कल को क्या किया जाए.
जिससे वह ज्यादा से ज्यादा कमा सके. और
100 सिक्के मुकम्मल कर लें.
बादशाह ने उस नौकर पर नज़र रखे हुए थे,और नौकर को देखकर बहुत हैरान था.
बादशाह ने सलाहकार को बुलवाया और कहा,
नौकर मैं इतना फर्क कैसे आया, उसने कहा यही तो है 99 का खेल.
लोग 99 को ही 100 करने में लगे हुए हैं और वह अपने आज को बर्बाद कर देते हैं,सौ करते करते.
आज वह सोने और खाने से भी मेहरुम हैं, और हमेशा इसी कोशिश में लगे हुए हैं कि इतना सा और मिल जाएगा तो मैं खुश हो जाऊंगा.
बादशाह को उसके सवाल का जवाब मिल चुका था,
और यकीनन आपको भी मिल गया होगा.आज हम सब 99 का ही खेल खेल रहे हैं.
और हम ज्यादा से ज्यादा लालची होते जा रहे हैं. और यह जानते हुए भी के पैसे की लालच हमें कभी कामयाब होने नहीं देगा.
क्योंकि यह ऐसे ही हैं जैसे छड़ी के कोने पर गाजर लटका दी.
और दूसरे कोने को खरगोश के सिरे से बांध दिया जाए.
और खरगोश उसके पीछे पीछे…ना वह पकड़ी जाए,और ना ही उसकी दौड़ खत्म हो.
इसीलिए पैसे का लालच…और ज्यादा मिल जाए. इससे हम कभी खुश नहीं होंगे.
इसलिए जितना खुदा ने दिया है उस में खुश रहने की कोशिश करें.
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