इस जमीन पर वह कौन से इंसान है जो क़ामयाब होते हैैं

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इस जमीन पर वह कौन से इंसान है जो क़ामयाब होते हैैं

इस जमीन पर वह कौन से इंसान है जो क़ामयाब होते हैैं।एक शख्स हजरत इमाम अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहो की खिदमत में आया। और अर्ज़ करने लगा। या अली इस जमीन पर वह कौन से इंसान है जो क़ामयाब होते हैं। और वह कौन से इंसान है जो नाकाम होते हैं। कामयाब इंसान की पहचान कौन सी है। तो अली रज़ी अल्लाह ताला अनहो ने फरमाया।इस जमीन पर वह कौन से इंसान है जो क़ामयाब होते है

ऐ शख्स क़ामयाबी इंसान का मुकद्दर है ।और नसीब इंसान के फैसले याद रखना इस जमीन पर सिर्फ 7 किस्म के इंसान रहते हैं। जो जितना वसी सोचेगा,दूर तक सोचेगा, जितना मंसूबा बंदी करेगा। वह उतना ही कामयाब और कामरान होगा। उसने पूछा या अली आपने इंसान की किस्में बयान फरमाए इस से क्या मुराद है। और कौन से किस्म वाले इंसान क़ामयाब होते हैं। और कौन से नकाम तो इमाम अली रज़ी अल्लाह ताला अनहो ने फरमाया।
इंसान का…

पहला किस्म जीसको नखीद कहते हैं।
उनकी सोच सिर्फ आज तक महदूद होती है। सुबह से लेकर रात तक यह कमाना है यह खाना है, यह लेना है ये मिलना है, यह देना है। दिन गुजरता है बगैर किसी मंसूबा बंदी के सो जाते हैं। और फिर सुबह उठते हैं और अपना दिन गुजार देते हैं। यह दुनिया में कभी कोई मुकाम हासिल नहीं करते। और मरने के बाद नहीं इनका नाम बाकी रहता है।इस जमीन पर वह कौन से इंसान है जो क़ामयाब होते है

दूसरा किस्म वलाप इस किस्म के इंसान सात अय्याम (दिन)की मंसूबा बंदी करते हैं। किस तरह से जीना है। अपना वक्त और फायदे को सिर्फ आज मे नहीं देखते बलके दिनों में देखते हैं। यह इंसान पिछले वाले इंसान से आगे तो बढ़ते हैं लेकिन सिर्फ खुशहाली तक,. उसके बाद..

तीसरा किस्म ओरम ये वह इंसान है। जो अपने मंसूबा बंदी महीनों तक करते हैं। जो अपने वक्त और मेहनत को मुसलसल कायम रखते हैं। और उनका फायदा दिनों में हासिल करना नहीं चाहते बल्कि इसके सोच माह तक महदूद रखते हैं। और यह पिछले वाले दोनों इंसानो से बहुत बावकार और बामयार होते हैं। और खुशहाली की राह पर चलते हैं। और सुकून की जिंदगी बसर तो करते हैं। लेकिन इसका ऐसा मुकाम नहीं होता। के इन के मरने के बाद इनको याद किया जाए। और…

चौथा किस्म वजीब यह न दिनों के लिए सोचते हैं न हफ्तों के लिए, न महीनों के लिए। इनकी सोच साल तक महदूद होती है। कि जो कारोबार कर रहे हैं ।जो काम कर रहे हैं। इनका फायदा मुझको एक बरस के बाद मीलेगा। और ऐसे लोग अमीर हो जाते हैं। और दूसरों को देने लगते हैं इनका हाथ कभी तंग नहीं होता। और इनके पास दुनिया की खूबसूरत चीज खरीदने की ताकत भी होती है। लेकिन मरने के बाद इनको भी याद नहीं किया जाएगा।इस जमीन पर वह कौन से इंसान है जो क़ामयाब होते है

पांचवा किस्म मसैेब ये इंसान सालो का सोचते हैं।
के 15 साल 25 साल 30 साल के बाद मैं रहूं या न रहूं मेरे बाद मेरी औलाद खुशहाल रहें कामयाब और कामरान रहे। इनकी सोच और इनके अफवाल और इनके फैसले आने वाली नस्लों के लिए होते हैं। और उनके पास दुनियावी दौलत इतनी हो जाती है। कि जिनको शुमार करना नामुमकिन होता है। और मरने के बाद इन की औलाद इन को याद करेगी और उसका नाम जमाने में बाकी रहेगा। और इंसान के…

छठ्ठे किस्म को स़ालेहीन कहते हैं। इनकी मंसूबा बंदी न दिनों तक क़ैद होती है ना हफ्तों तक ना महीनों तक ना सालों तक ये अपनी आखरत को देख कर चलतें हैं। कि हम ऐसे आमाल करें जिससे हमारी आखरत सुर्खरू हो, जिससे हमारी जन्नत की मकाम बावक़ार और बामयार हो। और इनका हर फेअल इसी बात पर मंम्बनी होता है। यह अपनी दुनिया गवां कर अपनी आखरत खरीद करते हैं। अल्लाह इनका न दुनिया में नाम मिटा देता है न आखरत में रुसवा करता है। और इंसान के …

सातवे किस्म को आलिन कहते हैं। इनके मन्ज़ील इनके फैसले न दिनोंं तक 9 हफ्ते तक ना महीनों तक 9 सालों तक न सदियों तक, बस इनका एक मकसद होता है, इनका परवरदिगार ए आलम इनसे राजी हो। वह न किसी तकलीफ को देखते हैं न जन्नत को देखते हैं, न राहत को देखते हैं ना सुकून को देखते हैं। सिर्फ अपने महबूब की रज़ा को देखते हैं। वो मुसीबत में भी शुक्र करते हैं।
और अपने लिए कुछ नहीं रखते, और अल्लाह की यह खीलकत अल्लाह को सबसे ज्यादा अज़ीज़ है। और उन आलिन मे।मै अली और मेरा भाई मुहम्मद और मेरी बीवी फ़ातीमा और मेरे बच्चे ह़सन व ह़ुसैन हैं।

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