Education

ईद का असल मकसद यह है इन्सान अपने अल्लाह के लिए उस दिन कोई गुनाह न करें

ईद का असल मकसद यह है इन्सान अपने अल्लाह के लिए उस दिन कोई गुनाह न करें

इमाम अली रज़ि अल्लाह ताअला अन्हु के खीलाफत के दौर में इमाम का एक चाहने वाला ईद से कुछ दिन पहले दो लीबास लेकर आया.

और दस्तेअदब जोरकर अर्ज करने लगा.या अली मैं आपके लिए और आपके गुलाम के लिए ये दो लिबास लेकर आया हूं.

ये जो लिबास महंगा है इसे आप रखिएगा और यह जो लिबास सस्ता है.यह अपने गूलाम को दीजिएगा.

इमाम अली रज़ि अल्लाह ताअला अन्हु ने उस शख्स की मोहब्बत देखकर वह हदया क़ूबूल किया.

जैसे वह गया तो मौलाए काएनात ने कम्बल तलब किया जैसे ही आप का गुलाम दौड़ता दौड़ता कम्बल लेकर आया.

तो मौलाए काएनात ने कहा ये जो मंहगा लिबास है इसे तुम लो और जो सदा लिबास है उसे रख दो उसनेे कहा या अली मैं गुलाम हूं सदा लिबास मुझे दें
और ये जो महंगा लिबास है आप रखें तो आपने फरमाया तूम जवान हो
ये महंगा लिबास तुम पर जंचेगा
मैं तो बुढ़ा हो चुका हूं सदा लिबास रहने दो.

और वह कम्बल महंगा लिबास लेकर चला गया और वह सदा लिबास पड़ा रहा.

इतने देर में एक इमाम का चाहने वाला आया और कहने लगा या अली मैं आपके ज़्यारत के लिए आया हूं.

इमाम अली रज़ि अल्लाह ताअला अन्हु ने मुस्कुराकर कहा मीज़म मैं तुम्हें ही याद कर रहा था.

ये जो लिबास रखा इसे लो और इसे ईद के दिन पहनना मीज़म वह लिबास लेकर चला गया दो दिन गज़रे इमाम अली रज़ि अल्लाह ताअला अन्हु.
वही पुराने जगह जगह से सीले और वही पुरानी चप्पल जो जगह जगह से सीले हुए थे,पहनकर मस्जिद के तरफ चलें और ईद की नमाज अदा की.
और ईद मुबारक कह के वापस आ रहें थे तो रास्ते में कुछ लोगों ने कहा या अली आप तो वक्त के ख़लिफा हैं.
यहां पर ग़रीब से ग़रीब इन्सान के पास अच्छे से अच्छे लिबास है जो पहनकर घुम रहे हैं और आप का लिबास इतना पुराना और फटा हुआ.

तो इमाम अली रज़ि अल्लाह ताअला अन्हु ने मुस्कुराकर कहा ईद का मकसद यह नहीं कि सिर्फ इन्सान महंगे और अच्छे लिबास पहने.

बल्कि ईद का असल मकसद तो यह है इन्सान अपने अल्लाह के लिए उस दिन कोई गुनाह न करें.
अच्छा लिबास पहनना ईद की नीसानी नहीं बल्कि अच्छा कीरदार ईद की निशानी है.

सुनलो मोमिन के लिए हर वह दीन ईद है जिस दिन वह गुनाह न करें बस यह कहके
आप जो यतीम बच्चे थे उनके पास तोहफे खजूर आनार लिए चले गए.
तमाम यतीमों के सर पर हाथ रखा प्यार किया उनको तोहफे दिए ताकि उनको यतीमी और गरीबी का एहसास न हो.
युं अपनी ईद इमाम अली यतीमो और गरीबों के साथ गुज़ारा करते थे

यह लेख अच्छा लगा तो लाइक शेयर कमेंट जरुर करें.ह़लाल रिज़्क़

इसे भी पढ़ें:अल्लाह को तकब्बुर पसंद नहीं.जो अपने सर को झुकाएगा वही जन्नत में दाखिल

इसे भी पढ़ें:Best Friendship Quotes

Related Articles

One Comment

Back to top button
Close
Close