कामयाबी और कामरानी इज्जत और शोहरत मुझसे कोसों दूर है|success|Fame in hindi.

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कामयाबी और कामरानी इज्जत और शोहरत मुझसे कोसों दूर है.

एक शख्स ह़ज़रत इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु के खिदमत में आया,और दस्तेअदब को जोरकर अर्ज़ करने लगा.
या अली मैं आगे नहीं बढ़ पाता हर काम में, मेरी तोहीन होती है,कामयाबी और कामरानी इज्जत और शोहरत मुझसे कोसों दूर है.(Kamyabee and Kamarani respect and fame are far from me.) success, Fame.
क्यों?
बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया.
ऐ शख्स इंसान एक बीज की तरह है,जैसे किसी दरख़्त के बीज को जमीन में लगाया जाता है, तो वह दरख़्त बन के उभरता है, और फल देता है.
लेकिन अगर उसी बीज को आसमान की तरफ उछाला जाए,तो वही दरख्त का बीज लौट कर जमीन पर गीरता है.
ऐसे ही जो इंसान झुक कर चलते हैं,अपने वजूद को तकब्बुर से पाक रखता है,अल्लाह उनके नेमतें बढ़ाता जाता है.
और उन्हें ऐसा मुकाम देता है, के तमाम इंसान उनकी इज्जत करने पर मजबूर हो जाता है.
लेकिन जो इंसान खुद को आला और दूसरों से बेहतर समझने लगता है,तो अल्लाह उसको जमीन पर गिरा कर उसकी औकात दिखा देता है.
याद रखना तकब्बुर सिर्फ अल्लाह पर जैब देता है इंसान पर नहीं.
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