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जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है। ये इबारत की जा है तमाशा नहीं है

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है।

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है, ये इबारत की जा है तमाशा नहीं है

न दील दादएं  शेर गोइ रहेगा,  न गीरवीदए शोहरा जोई रहेगा

न कोई रहा है न कोई रहेगा,    रहेगा तो ज़ीकरे नीकोई रहेगा

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है, ये इबारत की जा है तमाशा नहीं है

जब इस बज़्म में से उठ गए दोस्त अक्सर,  और उठते चलें जा रहें हैं बराबर

ये हर वक़्त पेशे नज़र जब है मंज़र, यहां पर तेरा दिल बहलता है क्योंकर

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है, ये इबारत की जा है तमाशा नहीं है

हुए नामवर बेनिशा कैसे कैसे، ज़मीन खा गई नौजवान कैसे-कैसे

ये हर वक़्त पेशे नज़र जब है मंज़र, यहां पर तेरा दिल बहलता है क्योंकर

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है, ये इबारत की जा है तमाशा नहीं है

तू यहां मुसाफिर है यह सराय पानी है, चार रोज़ की मेहमां तेरी जिंदगानी है

धन ज़मीन जर जेवर कुछ न साथ जाएगा,
खाली हाथ आया है, खाली हाथ जाएगा

हर वक़्त पेशे नज़र जब है मंज़र, यहां पर तेरा दिल बहलता है क्योंकर

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है, ये इबारत की जा है तमाशा नहीं है

जान कर भी अंजाना बन रहा है दीवाने, अपने उमरे फानी पर तन रहा है दीवाने

किस कदर तो खोया है इस जहां के मेले में, तू खुद आपको भूला है फस के इस झमेले में

आज तक यह देखा है पाने वाला खोता है, जिंदगी को जो समझा जिंदगी पे रोता है

हर वक़्त पेशे नज़र जब है मंज़र, यहां पर तेरा दिल बहलता है क्योंकर

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है, ये इबारत की जा है तमाशा नहीं है

मिटने वाले दुनिया का ऐतबार करता है, क्या समझ कर तू आखिर इस से प्यार करता है

अपनी अपनी फिक्रो में जो भी है वह उलझा है, जिंदगी हकीकत में क्या है कौन समझाए है

आज समझ ले कल यह मौका हाथ ना तेरे आएगा
ओ गफलत की नींद में सोने वाले धोखा खाएगा

हर वक़्त पेशे नज़र जब है मंज़र, यहां पर तेरा दिल बहलता है क्योंकर

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है, ये इबारत की जा है तमाशा नहीं है

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