History in Hindi

जमीन पर जन्नत और फाहशाओ़ को ह़ूरें बना देने वाला शैतान| सबाह|in hindi.

जमीन पर जन्नत और फाहशाओ़ को ह़ूरें बना देने वाला शैतान| सबाह|in hindi.

ईरान के शहर में निशाापुर में तीन लड़के इल्म हासिल करते थे.यह तीनों बड़े गहरे दोस्त थे.
इनमें से एक लड़के का नाम उमर था,और बाकी दोनों लड़के का नाम ह़सन था.

एक दिन यह तीनों ने आपस में अहद किया के अगर हम में से कोई आला मुकाम पर पहुंच गया तो वह दोनों दूसरे साथियों की मदद करेगा.

मकतब के दूसरे लड़कों ने जब यह देखा तो खूब हंसे,के यह गरीब लड़के क्या किसी मुकाम पर पहुंचेंगे.लेकिन किस्मत उल्टा इन पर हंस रही थी. क्योंकि यह तीनों ही लड़कों ने अपने अपने शोबों में ऐसा नाम पैदा किया जो सदिया गुजर जाने के बावजूद दुनिया इन की सलाहियत के मोतारीफ है.

उमर नाम का लड़का आगे चलकर उमर खैयाम बना इसकी लाजवाल शायरी आज एशिया से ज्यादा यूरोप के लोगों को दीवाना बना हुए है.

हसन नाम का पहला लड़का निजाम उल मुल्क तुसी बना,उस दौर में इस्लामी मुल्क पर सहयोगी हुक्मरानी करते थे.इस मुल्क की सरहदें खुरासान से होकर मिश्र तक पहुंचती थी.
अपनी ज़हानत और सलाहियतों के दम पर ह़सन तुसी का वजीर-ए-आजम बना,और इस सल्तनत को ऐसा उरुज़ बख्शा के लोग बादशाह से ज्यादा इसके गुण गाते.

जबकि दूसरे ह़सन नाम के लड़के ने दुनिया में वह तबाही और फितना बरपा किया के तमाम इंसानियत को लरज़ा कर रख दिया.

यह लड़का हसन बिन सबाह के नाम से दुनिया भर में मशहूर हुआ मशहूर जमाना वीडियो गेम फिल्म Assassin Creed इसे हसन बिन सबाह से स्पाइड है. मकतब की तालीम मुकम्मल करने के बाद यह तीनों लड़के अपनी अपनी राह चले गए,

उमर खैयाम निशापुर में ही मुकीम रहे,और एक तवायफ से शादी की जिंदगी बहुत गुरमत में गुजर रही थी, की आपको किसी ने खबर दीे तुम्हारा फला दोस्त तुसी का वजीर-ए-आजम बन गया है.

लिहाजा आप अपने दोस्त निजाम उल मुल्क तुसी से मिलने पहुंचेे, इत्तेफाक से वहां उमर बिन सबाह भी उमर खैयाम से मिला.
यह दोनों हज़रात अपने दोस्त के सामने हाज़िर हुए, निजाम उल मुल्क तुसी ने उमर खैयाम को उसकी ख्वाहिश के मुताबिक एक बड़ी जागीर से नवाजा.

जब के ह़सन बीन सबाह को इसके ख्वाहिश के मुताबिक महल के कोतबाल का ओहदा इनायत किया.वह यह जागिर लेकर मुतमईन हो गए.

लेकिन हसन बिन सबाह जो फितरतन मक्कार था,अपने ही दोस्त और मोहसिन निजाम उल मुल्क की जड़े काटने लगा.
एक मर्तबा बादशाह ने निजाम उल मुल्क तुसी से दरियाफ्त किया,आप सल्तनत के मिली गोषवारा कितने मुद्दत में तैयार कर सकते हैं.

निजाम उल मुल्क तुसी ने सोच-विचारकर एक साल का वक्त मांगा,हसन बिन सबाह भी उस वक्त वहां मौजूद था. ये अचानक बोला कि मैं यह काम 40 दिन में कर सकता हूं.
बादशाह ने इसे इजाज़त दे दी.

लेकिन उसने कहा कि अगर मैं यह काम करने में कामयाब रहा तो आप निजाम उल तुसी की जगह
मुझे वजीर-ए-आजम के ओहदे से नवाजेंगे,इस बात पर निजाम उल मुल्क के साथ-साथ बादशाह को भी गुस्सा आया, मगर दोनों ने सब्र किया.

बहरेहाल 40 दिन के बाद वह एक गोषवारा लेकर बादशाहों के पास हाजिर हुआ,यह एक
ना मुकम्मल और झूठे आजादोशुमार पर मम्बनी गोषवारा था, बादशाह एक खुद भी ज़ीरत इंसान था, थोड़ी सी जांच पड़ताल के बाद जान गया कि यह झूठा है.
और उसने हसन बिन सबाह को मौत की सजा सुना दी. मगर निजाम उल मुल्क तुसी के कहने पर उसे माफ किया, और सिर्फ दरबार से दफा हो जाने को कहा.

उसके बाद हसन बिन सबाह मिस्र पहुंचा, वहां फातमीड हिलाफत कायम थी, यहां इसने स्माइली मजहब अख्तियार किया, और खालीफा मुसतनसर के बेटे नज़्ज़ार की तरफदारी करने लगा.
लेकिन मुसतनसर खलीफा का वज़िर बदर जमाली जो कि नीहायत ताक़वर था, उसने हसन बिन सबाह को ही इसाई लुटेरे के हवाले कर दिया.
यह अपनी चालाकी के बदौलत यहां से भी बच निकला, और मुख्तलिफ शहर का सफर करते हुए ईरान के शहर कज़वैन पहुंचा.

अब इसने एक नेक सीरत बुजुर्ग का रूप धारण किया, भोले-भाले लोग इसके फालसाफियाना बातों में आकर इसके मुरीद हो जाते थे.इसकी आंखों में एक ऐसी कशिश थी, के औरतें इसके तरफ देखते ही इसके गुरविदा हो जाती.

यह दौराने सफर जिस औरत से भी ताल्लुक कायम करता, उसका नाम और पता एक डायरी में लिख लेता.
इसी तरह यह हुनरमंद अफराद का भी नाम और पता डायरी में लिख लेता.

काज़मैन में मौजूद एक किला अलमौत हसन बिन सबाह को बहुत पसंद आया, और इसने यहीं अपना मसकन बना लिया, इस किले का मालिक हसन बिन सबाह का अकीदतमंद था.

लेकिन हसन बिन सबाह के मुरि्दों की तादात में इजाफा हुआ तो उसने इस किले का मालिक को ही निकाल बाहर किया.

यह किला काफी बड़े रकबे पर मुशतमील था. इसके अंदर बहुत सारे महल थी इसी दौरान हसन बिन सबाह जो कि एक हकीम भी था.इस पर हशीश की पत्तियों का इनकेशाफ हुआ, इसे इंडिया और पाकिस्तान में भंग कहा जाता है.

इसने अपने मुरीदों को लूट मार के काम पर लगाया और इस से हासिल होने वाले दौलत से किले के अंदर एक खुफिया जन्नत तामीर करवाई.

दौराने सफार इसने जीस खूबसूरत औरत और हुनरमंद आफराद के नाम लिखे थे.इन्हे इस किले में बुलवा लिया, इस किले में दूध की मसनुई नहर बहाइ गई, सोने और चांदी के महल तामिर किए गए, ऐसे दरख़्त लगाए गए जिनका साया निहायत गहरा था. खूबसूरत तरीना फाहीशा औरत को हूरों का नाम दिया गया.

अब जिस मुरीद को जन्नत का सैर कराना मकसद होता, उसे भंग के नशे में इस मसनुई जन्नत में छोड़ दिया जाता, और कुछ देर बाद उसे बाहर निकाल लिया जाता.

अब वह इस जन्नत में जाने के लिए किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार होता. इस प्रकार हसन बिन सबाह ने फिदाइयों की एक ऐसी फौज तैयार करली, जिसे मौत ज़िन्दगी से ज्यादा अज़ीज़ थी.

और इस फौज के जरिए हसन बिन सबाह ने अपने बचपन के दोस्त निजाम उल मुल्क तुसी और हसन अब्बासी खुलफ़ा से लेकर दुनिया ए इस्लाम के बड़े-बड़े नामों को कत्ल करवा दिया,न सिर्फ इस्लामी दुनिया बल्कि इसके फिदायीन के पहुंच यौरप के बादशाहत तक थी.

छोटे-छोटे रियासतें इसके सर से महफूज रहने के लिए खराज पेश करती है, उसने अपने कीले अमौत और मसनुई जन्नत के कानून इस क़दर सख्त बना रख्खै थे कि रोज़ दो तीन गुलाम कनीज़े सजा-ए-मौत का शिकार बनती.

यहां तक कि अपने दो सगे बेटे को क़त्ल करवा दिए, और मुरिदों में एहतराम और दैहसत का यह आलम था.के उसके उंगली की एक इशारे पर दर्जनों लोग मौत को गले लगा लेते, उसने अपने किला अलमौत और मसनूई जन्नत में छोटे छोटे खुफिया आईने इस तरह नसफ किए थे कि cc tv कैमरा के काम करते थे.
और इस से तमाम किले का राज मालुम रहता.

इसके मुरीद हसन बिन सबाह का रूहानी ताक़त समझते.
और समझते हसन बिन सबाह हर चीज़ अपने बजरीयाए कशफ के जरिए जान लेता है.

मलिक शाह सलजोक ने इस फीतने के खात्मे के लिए, कई मर्तबा फौज कशी की मगर किला अलमौत पहाड़ पर होने की वजह से नाकाम होते.
हसन बीन सबाह ने दुनिया में 35 साल तक कत्ल व गारतगरी का बाजार गर्म रखा.और वासीले जहन्नम हुआ.

बाद में इसके जानशिनों ने डेढ़ सौ साल तक मखलूक ए खुदा की नाक में दम किए रखा.
यहां तक कि हलाकू खान का गुज़र इस इलाके से हुआ, और उसने यह किला सफा ए हस्ती मिटा दिया.

एक एक सिपाही को चुन-चुनकर कत्ल कर डाला. मगर हसन बिन सबाह आज भी सिर्फ एशिया ही में नहीं बल्कि यूरोप ममालिक में भी दहशत की अलामत माना जाता है.

अच्छा लगा तो लाइक शेयर कमेंट जरुर करें

Related Articles

312 Comments

Back to top button