Relationships

तीन रिश्ते इंसान की जिंदगी में बेनकाब हो जाते हैं।

तीन रिश्ते इंसान की जिंदगी में बेनकाब हो जाते हैं।

तीन रिश्ते इंसान की जिंदगी में बेनकाब हो जाते हैं। हज़रत अली रज़ी अल्लाह ताला अन्हु फरमाते हैं। इंसान को जीस वक्त उन रिश्तो की जरूरत होती है। उन रिश्तो का असली चेहरा इंसान के सामने जाहिर हो जाता है।

1 पहला रिश्ता मां बाप के सामने अपनी औलाद का रिश्ता, उस वक्त बेनकाब हो जाता है। जिस वक्त मां बाप बुढ़े हो जाते हैं।और औलाद जवान हो जाते हैं। उस वक्त औलाद अपनी मां बाप का कितना ख्याल रखता है। मां-बाप की जरूरीयात को कितना पूरा करता है। मां बाप को कितना सहारा देता है।उस वक्त औलाद का चेहरा मां बाप के सामने बेनकाब हो जाता है।

2 दूसरा रिश्ता सोहर के सामने अपनी बीवी का रिश्ता, उस वक्त बेनकाब हो जाता है। जिस वक्त सोहर की ज़िंदगी में अचानक गूरबत (ग़रीबी) आ जाती है। हालात तंग हो जाते हैं उस वक्त बीवी सोहर का कितना साथ देती है। सोहर का कितना ख्याल रखती है। सोहर के सामने बीवी का चेहरा उस वक्त बेनकाब हो जाता है।

3 तीसरा रिश्ता इंसान की जिंदगी में उसके दोस्त का रिश्ता उस वक्त बेनकाब हो जाता है। जिस वक्त किसी इंसान की जिंदगी में अचानक कोई मुसीबत आ जाती है। वह इंसान यह देखता है कि इस मुसीबत की घड़ी में उसके दोस्त ने कितना साथ दिया। इंसान के सामने उस वक्त उसके दोस्त का चेहरा बेनकाब हो जाता है।

इंसान के जिंदगी में तीन रिश्ते बेनकाब हो जाते हैं। मुसीबत में दोस्त का रिश्ता, तंगहालात में सोहर के सामने अपनी बीवी का रिश्ता, बुढ़ापे में औलाद का रिश्ता

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