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नेक दिल बादशाह और फकीर की वाक्या

नेक दिल बादशाह और फकीर की वाक्या

नेक दिल बादशाह और फकीर की वाक्या किसी मुल्क में एक बादशाह हुकूमत करता था। वह अपनी रियाया में हर दिल अजीज था। उसके मुल्क में हर खास व आाम उस से खुश था। और उसका वजीर भी अच्छा था।नेक दिल बादशाह और फकीर की वाक्या

बादशाह हर रोज सुबह अल्लाह के नाम लेकर उठता और अपनी प्रजा की भलाई में लग जाता। जिंदगी यूं ही गुजर रही थी कि किसी दुश्मन मुल्क ने हमला कर दिया। बदकिस्मती से बादशाह को शिकस्त का सामना करना पड़ा और बादशाह को कैद में डाल दिया गया।और आहिस्ता आहिस्ता हालात फिरसे मामूल पर आने लगे।नेक दिल बादशाह और फकीर की वाक्या

आने वाला बादशाह भी रियाया के दिल जीतने में लग गया। और जिंदगी फिर रबा हो गई। मगर यहां कैदी बादशाह शब-ओ-रोज़ यह सोचने में लगाने लगा। आखिर मुझसे कहां गलती क्या गुनाह हुआ है। जिसकी सजा मिल रही है। बादशाह कैदखाने में भी अल्लाह का शुक्र अदा कर रहा था। और उसका खाना भी वक्त पर पहुंच जाता था।

लेकिन जब दोपहर के खाने का वक्त होता तो उसे शाही खाने की खुशबू आने लगती। वह सोचता शायद उसके लिए आज शाही खाना आने वाला है। मगर खाना आता तो वही कैदियों वाला। वह समझ नहीं पाता था कि आखिर यह खुशबू कहां से आती है। बादशाह को कैदखाने माह होने के थे। एक दिन बादशाह को सुबह की खाना नहीं दिया गया।

और दोपहर का खाना भी उसके टाइम पर ना पहुंचा, अब बादशाह को भूख सताने लगी कि अचानक बादशाह को वही सही खाने की खुशबू आने लगी। उसने अपने कैदखाने में मौजूद रोशनदान से आवाज़ लगाई। कि अल्लाह का कोई बंदा उस तरफ है तो मुझे कुछ खाने को दें।मैं भूखा हूं।

कैदखाने के बाहर एक आदमी था। उसने कपड़े के अंदर कुछ बांधकर रोशनदान के अंदर फेंक दिया। बादशाह ने जब उस को खोला तो उसको यह देख कर ताज्जुब हुआ कि यह तो वहीं शाही चावल है ।जिसकी खुशबू उसे हर रोज आती थी। बादशाह ने उससे पूछा कि आप कौन हैं दीवार के उस पार से आवाज आई। कि मैं एक फकीर हूं।

और हर रोज भीख मांगने के लिए मैं यहीं बैठता हूं बादशाह को यह सुनकर बड़ा ताज्जुब हुआ। के शाही चावल एक फकीर के पास क्यों कर हो सकते हैं। बादशाह ने अपने सवाल को फकीर के सामने रखा तो फकीर ने बताया। कि वह इस वक्त जिस दीवार के सामने बैठा है इस दीवार से होकर एक नाली निकल रही है। जो के महल के शाही बाबर्ची जी खाने से है। जब मैं हर रोज यहां आता हूं तो इस नाली के आगे एक कपड़ा बांध देता हूं। इस वजह से आने वाला खाना और चावल उस कपड़े में रह जाते हैं। फिर वह खाना घर ले जाता है और उसमें से चावल अलग करके उसे धोता है।

और उस चावलों को सुखाकर जमा कर लेता है। और इसी तरह उसने काफी चावल जमा कर रखे हैं। और अब यह खाना और जमा नहीं कर पा रहा है। क्योंकि यह खाना उसने पहले के हुक्मरान की हुकूमत में जमा किया था।नेक दिल बादशाह और फकीर की वाक्या

उस फकीर ने निहायत ही अफसोस के साथ बताया। शायद अब के बादशाह अपने मूलाजीम को खाना फेंकने नहीं देता। यह सुनते ही बादशाह समझ गया कि आखिर उसे किस गुनाह की सजा मिली है। फकीर जब अपनी बात कह चुका तो उसने बादशाह से पूछा। कि वह कौन है और कैदखाने में क्यों है। बादशाह ने अस्कबार होकर उसका जवाब दिया। के वह एक बदनसीब बादशाह था।

और इस वक्त वह अल्लाह की नेमत को ज़ाया करने की सजा काट रहा है।नेक दिल बादशाह और फकीर की वाक्या

दोस्तों अल्लाह ताला की नेमत सिर्फ अनाज ही नहीं है। बल्कि हर वह अलग चीज है जिसके इस्तेमाल से हम को सुकून मिलता है। हवा-पानी मकान कपड़ा पेट्रोल डीजल गैस और बिजली यह सब हमारी अल्लाह की नेमतें हैं। जो चीज आपके इस्तेमाल करना न हो उसे अपनी जरूरतमंद भाई को दे दें।

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