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पड़ोसियों के हक

पड़ोसियों के हक

पड़ोसियों के हक
इमाम अली रज़ि अल्ल्लाहु ताअला अन्हू रस्ते से गुजर रहे थे, देखा, एक शख्स अपने पड़ोसी से लड़ रहा था, इमाम अली करीब गए और फ़रमाया, ऐ बंदा ए खुदा तुम्हारे पेशानी पर यह सजदे का निशान, यह बता रहा है कि तुम चाहते हो कि तुम्हें जन्नत मिले, अल्लाह तुम से राज़ि हो।

वह दस्तेअदब को जोड़कर कहने लगा हां या अली, मेै दिन-रात अल्लाह की इबादत करता हूं।

फीर इमाम अली ने कहा, अल्लाह उस शख्स की इबादत कबूल नहीं करता, जो पड़ोसियों से झगड़ा करता है, पड़ोसियों पर ज़ुल्म करता है, पड़ोसियों के हक़ पूरे नहीं करता।

उस शख्स ने कहा या अली यह जो मेरे पड़ोसी है इसकी बहुत बुरी आदत है, के जब भी मैं अपने बच्चों के लिए कोई चीज़ लेकर जाता हूं, ये घुड़के देखते हैं, जैसे कि सदियों से भूखे हो।

इमाम अली की आंखें नम हो गई, और इमाम अली उन बच्चों के सर पर हाथ रखकर फरमाने लगे, ऐ शख्स अल्लाह ने जिसको ज़्यादा दिया, वो इसलिए दिया ताकि वह उनकी मदद कर सके, जिनके पास कम है।

शैतान तुम्हें भटका रहा है। याद रखना अल्लाह क़यामत के दिन हुकूक अल्लाह के बारे में बाद में सवाल करेगा, पहले हुकुकुल इबाद के बारे में पूछेगा।

अगर तुमने अपने पड़ोसियों से नफरत की तो क़यामत के दिन अल्लाह के रसूल की सफाअत से महरुम रहोगे।

अपने बच्चों से तो जानवर भी प्यार करते हैं, लेकिन इंसान वह है जो दूसरों के बच्चों को भी अपने बच्चों की तरह प्यार दे।

पड़ोसियों के हक

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