मालदार आदमी और मलकुल मौत का वाकिया

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मालदार आदमी और मलकुल मौत का वाकिया

मालदार आदमी और मलकुल मौत का वाकिया
एक बुजुर्ग फरमाते हैं हमसे पहले उमतों में एक शख्स था। जिसनेें बहुत सारा माल दौलत जमा किया हुआ था। और उसकी औलाद भी काफी थी।उसे तरह तरह की नेमतें मोयस्सर थी।
बहुत सारा माल होने के बावजूद वह निहायत कंजूस था। अल्लाह ताला की राह में वह कुछ भी खर्च नहीं करता था। वह हर वक्त इसी कोशिश में रहता था कि किसी तरह मेरी दौलत में इजाफा हो जाए। जब वह बहुत सारा माल व दौलत जमा कर चुका तो वह अपने आपसे कहने लगा अब तो मैं बहुत ऐसो आराम की जिंदगी गुजारुंगा। चुनांचे वह अपने फैमिली के साथ बहुत ऐश व आराम से रहने लगा। बहुत से गुलाम हाथ बांधे उसके हुकुम के मुनतज़ीर रहते थे। अल गरज़ वह इस दुनियावी अशाइसों में इतना मगन हुआ। कि अपनी मौत को बिल्कुल भूल गया। एक दिन मुलकुल मौत एक फकीर की सूरत में उसके घर आए। और दरवाजा खटखटाया गुलाम फौरन दरवाजे की तरफ दौड़े। उसने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने एक फकीर को पाया उसने उस फकीर से पूछा आप यहां किसलिए आए हो। उस फकीर ने जवाब दिया जाओ अपने मालिक को बाहर भेजो मुझे उसी से काम है। खादिम ने झूठ बोलते हुए कहा वह तो तेरे ही जैसे किसी फकीर को मदद करने के लिए बाहर गए हैं। मलकुल मौत यह सुनकर वहां से चले गए और कुछ देर बाद फिर दोबारा आए। और दरवाजा खटखटाया उसके गुलाम आए तो उसने कहा जाओ अपने मालिक से कहो कि मलकुल मौत आया है। जब उस मालदार शख्स ने यह बात सुनी तो बहुत ज्यादा खौफजदा हुआ। फिर उसने अपने गुलामों से कहा जाओ और उससे बहुत नरमी से बात करो, ग़ुलाम बाहर है और मलकुल मौत से कहने लगे कि आप मेरे आका के बदले किसी और का रूह निकाल लें। और उसे छोड़ दे अल्लाह आपको बरकत अता फरमाए। मलकुल मौत ने फरमाया ऐसा हरगिज़ नहीं हो सकता और अंदर तशरीफ ले गए। और मलकुल मौत ने उस शख्स से कहा तुझे जो वसीयत करनी है कर ले मैं तुम्हारी रूह लिए बगैर यहां से नहीं जाऊंगा। यह सुनकर सब घर वाले चिख उठे और रोना-धोना शुरू कर दिया। उस शख्स ने अपने गुलामों से कहा कि सोने से भरे संदूक खोल दो। और मेरे तमाम दौलत मेरे सामने ले आओ। हुक्म की तामील हुई और सारा खजाना उसके कदमों के सामने ढेर कर दिया गया। वह शख्स सोने चांदी के ढेर के सामने आया और कहने लगा।ऐ जलील व बदतरीन माल तुम पर लानत हो। के तुमने ही मुझे परवरदिगार के जिक्र से ग़ाफ़िल रखा। और तूने ही मुझे आखरत की तैयारी से रोके रखा। यह सुनकर वह माल उससे कहने लगा तु मुझे मलामत ना कर, क्या तू वही नहीं जो दुनिया दारों की नजरों में हक़ीर था।मैंने ही तेरी इज्जत बढ़ाई।
मेरी ही वजह से तेरी पहुंच बादशाहो की दरबार तक हुई। वरना गरीब और नेक लोग तो वहां तक पहुंच ही नहीं सकते। मेरी ही वजह से तेरा निकाह शहजादियों और अमीर जादीयों से हुआ। और गरीब लोग कहां उनसे शादी कर सकते हैं। लेकिन यह तो तेरी बदवख्ती है कि तूने मुझे शैतानी कामों में खर्च किया। अगर तु मुझे अल्लाह ताला की राहों में खर्च करता तो तेरी मुकद्दर में ज़ील्लतों रुसवाई न होती। क्या मैंने तुझे कहा था कि तुम मुझे नेक राहों में खर्च न कर, आज के दिन मैं नहीं बल्कि तू ज़्यादह मलामत और लानत का मुसतहीक है।ऐ इब्ने आदम बेशक मैं और तू दोनों ही मिट्टी से पैदा किए गए हैं। और बहुत से लोग ऐसे हैं जो नेकी की राह में कामज़न है और बहुत से लोग गुनाहों में मसरुफ़ हैं। और लिहाजा इस माल की बुराइयों से बच कर रहो और इसे नेकी की राहों में खर्च करो।

अल्लाह ताअला से दुआ करते हैं कि अल्लाह ताअला हमें नेकी करने की तौफीक अता फरमाए।

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