chidiya ki nasihat – चिड़िया की नसीहत भरी कहानी in hindi.

0

chidiya ki nasihat – चिड़िया की नसीहत भरी कहानी in hindi.
चिड़िया की नसीहत भरी कहानी in hindi.
एक समय की बात है किसी जंगल में एक शिकारी ने चिड़ियां पकड़ने के लिए जाल बिछाया। इत्तेफाक से एक चिड़िया उस जाल में फंस गई। शिकारी ने उस चिड़िया को पकड़ लिया।

चिड़िया ने उस शिकारी से कहा ए इंसान तूने कई बकरे, हिरन, मुर्गा बगैरा खाए हैं। इन चीज़ों के मुक़ाबले में मेरी क्या हक़ीक़त है। ज़रा सा गोश्त मेरी जिस्म में में है। इससे तुम्हारा क्या बनेगा। तुम्हारा तो पेट भी नहीं भरेगा। लेकिन अगर तुम मुझे आजाद कर दो, तो मैं तुम्हें तीन नसीहत करूंगी। जिन पर अमल करना तुम्हारे लिए बहुत फायदेमंद होगा।

जिसमें से एक नसीहत तो मैं अभी करूंगी। दूसरी उस वक्त करूंगी जब तुम मुझे छोड़ दोगे, और दीवार पर मैं जाकर बैठूंगी।
उसके बाद तीसरी और आखिरी नसीहत उस वक्त करूंगी जब दीवार से उड़कर सामने पेड़ के टहनी पर जा बैठूंगी।

चिड़िया की ये बातें सुनकर उस शख्स के दिल में ये ख्याल हुआ न जाने चिड़िया क्या फायदेमंद नसीहत करें। शिकारी ने उस चिड़िया की बात मानते हुए चिड़िया से कहा तुम मुझे पहली नसीहत करो फिर मैं तुम्हें छोड़ दूंगा।

इस पर चिड़िया ने पहली नसीहत की के “ जो बात कभी नहीं हो सकती उस पर कभी यकीन नहीं करना”। यह सुनकर उस आदमी ने चिड़िया को छोड़ दिया। और वह सामने दीवार पर जा बैठी।

फिर दूसरी नसीहत बोली जो बात हो जाए उसका गम न करना। फिर कहने लगी ए भले मानुष तूने मुझे छोड़ कर बहुत बड़ी गलती की है,
क्योंकि मेरे पेट में पाव भर का बहुत ही नायाब पत्थर है। अगर तुम मुझे जीबाह करते और मेरे पेट से यह मोती को निकाल लेते, और उसे बेचते तो तुम्हें इतनी दौलत मिलती कि तुम्हारे आने वाली कई नस्लों के लिए काफी होता।

चिड़िया की यह बातें सुनकर वह सख्स बहुत पछताया और मन ही मन कहने लगा कि मैंने जिंदगी के सबसे बड़ी गलती की है, इस चिड़िया को छोड़कर, अगर इसे नहीं छोड़ता तो मेरी नसले संवर जाती।

चिड़िया ने उसे इस सोच में पड़ा देखा तो दरख्त पर जा कर बैठी और बोली ऐ भले मानुष मैंने अभी-अभी तुम्हें पहली नसीहत की, और तुम भूल गए कि जो बात नहीं हो सकने वाली हो उसका यकीन कभी मत करना। फिर भी तुमने इस बात का एतबार कर लिया कि मैं थोड़ा वजन की चिड़िया अपने पेट में पाव भर का मोती रखती हूं। क्या यह मुमकिन है, हरगिज़ नहीं।

मैंने तुम्हें दूसरी नसीहत यह की थी कि जो बात हो जाए उसका गम ना करना। मगर तुम्हें दूसरी नसीहत का भी कोई असर न हुआ और तुम गम में मुब्तिला होगए के बेकार मुझे जाने दिया।

ए इंसान तुम्हें कोई भी नसीहत करना बिल्कुल बेकार है। तूने मेरी पहली दो नसीहत पर कब अमल किया कि तीसरे नसीहत पर अमल करेगा।
तुम नसीहत के काबिल नहीं।

यह कहकर चिड़िया फिर उड़ गई और हवा में परवाज कर गई। वो शख्स वहीं पर खड़ा चिड़िया की बात सुनकर गौर व फिक्र में खो गया।

वो लोग खुश नसीब होते हैं जिन्हें कोई नसीहत करने वाला हो। आज हम खुद को सबसे बड़ा अक़्ल वाला समझ कर के कोई गरीब साथी, और बुजुर्गों की बातों पर अमल नहीं करते। और नुकसान हमारा ही होता है। ये नसीहत सिर्फ कहने की बातें नहीं होती कि किसी ने कहा हमने सुन लिया। बल्कि समझदार और दूसरों से हासिल होने वाली अनमोल खजाने। जो यकीनन हमारे लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। अगर हम नसीहत पर अमल करें।

दोस्तों यह लेख अच्छा लगा तो लाइक शेयर कमेंट जरुर करें और अपने दोस्तों का शेयर भी करें।

Read it:-Story of duck and his egg in hindi|बत्तख और मुर्गी के दिलचस्प कहानी