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dimag ki takat kya hai – Sharp brain

dimag ki khurak kya hai

हज़रत इमाम अली रज़ि अल्लाह ताअला अन्हु की ख़िदमत में एक शख्स आया, और कहने लगा, या अली ज़ेहन (मन) की खुराक़ क्या है?

जैसे ही यह पूछा गया तो इमाम अली अल्लाह ताअला अन्हु ने फ़रमाया, ऐ बंदा ए खुदा मैंने अल्लाह के रसूल ﷺ से सुना के ज़ेहन (मन) की खुराक अच्छा सोचना है।

क्योंकि अल्लाह ने इस पूरे कायनात को इंसान के दिमाग से जोड़े रखा है। लेकिन अफसोस जो इन्सान इस कायनात के ख़िलकत के बारे में बुरा सोचते हैं या लोगों और चीज़ों में से ऐब निकालते हैं। तो यूं इंसान अपने ही दिमाग के ताक़तों को कम करता रहता है।

Sharp brain

ए बंदा ए खुदा अगर इंसान अच्छी सोच के साथ इस कायनात में रहना शुरू कर दे तो अल्लाह इंसान के दिमाग को कायनात पर हुक़ूमत अता कर देगा।

तो वो शख्स कहने लगा या अली अच्छा सोचने से मुराद क्या है? जब बात यहां तक पहुंची तो इमाम अली रज़ि अल्लाह ताअला अन्हु ने फ़रमाया।
अच्छा सोचने से मुराद माफ करना है। इस कायनात के हर खिलकत के लिए अमन सलामती की सोच को मुकद्दम रखना है।

ऐ बंदा ए खुदा मैंने अल्लाह के रसूल ﷺ से सुना के अल्लाह ने आसमानों के बीच में फरिश्तों के लिए एक दरवाज़ा क़ायम किया, कि हर उस इंसान के लिए खुलता है, जिस इंसान के दिमाग में अल्लाह के मख़लूक़ के लिए अच्छी सोच होती है।

और उन फरिश्तों का काम ये होता है की वह कायनात के हर नेमत को उस इंसान के क़दमों में बिछाते रहे।

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