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I Love you ki haqiqat | Mohabbat | ishq | like prem | प्यार की हक़ीक़त

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I Love you ki haqiqat | Mohabbat | ishq | prem | प्यार की हक़ीक़त

ह़ज़रत इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु के ख़िदमात में एक शख्स आया और दस्तेअदब को जोड़ कर अर्ज करने लगा या अली! इश्क, मोहब्बत की हक़ीक़त और पहचान किया है? बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया क़यामत की निशानियों में से एक निशानी ये है कि एक वक्त ऐसा आएगा, जीस दौर में हर कोई हर किसी को ये कहेगा कि मैं तुम से मोहब्बत करता हूं। लेकिन अफसोस कहने वाले को और न सुनने वाले को उसकी अस्तित्व से प्रतिबद्धता नहीं होगी।

I Love you ki haqiqat

ऐ शख्स याद रखना जहां मेरा, या मेरी हो, वहां मोहब्बत नहीं होती। अगर कोई यह कहता है यह सवारी मेरी है। यह भाई मेरा है। यह औलाद मेरी है। तो उस वक्त वो उन चीज़ों से पहले, अपना ज़िक्र करता है। इंसान इंसान से एक दूसरे की वजह से नहीं बल्कि अपने ही एहसास की वजह से जोड़ते हैं। मां औलाद से उस इंसान के लिए मोहब्बत नहीं बल्कि यह सोच के मोहब्बत करती है कि इसको मैंने पैदा किया है। यह मेरे जिस्म का हिस्सा है।
औलाद मां-बाप से मोहब्बत इसलिए करता है। क्योंकि वो ये समझता है। इन्होंने मेरी परवरिश की है। मुझे पाला है। इंसान सिर्फ अपने आप से मोहब्बत करता है। जहां साथ रहने की बात हो, किसी को हासिल करने की तलब हो, तो वह मोहब्बत नहीं खुद पसंदी है। जहां अपना कोई एहसास ना हो, जहां अपने कोई ख्वाहिश ना हो, जहां उसकी हस्ती मिट जाए, वहां मोहब्बत के निम का आगाज होता है। तभी अल्लाह ने मोहब्बत की मिसाल सजदे को रखा। ताकि इंसान के नजदीक यह वाजेह हो जाए, खुद के वजूद को खम करना, खुद की ख्वाहिश को खत्म करना ही असल मोहब्बत है।

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I Love you ki haqiqat in video

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